• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

बदले बदले से परवेज़ मुशर्रफ़

By Staff
|
मुशर्रफ़ रावलपिंडी के आर्मी हाउस में रह रहे हैं
परवेज़ मुशर्रफ़ कुछ महीनों पहले तक ऐसा नाम था, जिसके हर क़दम, हर भाषण पर दुनियाभर की निगाह रहती थी. क्या कर रहा है आजकल वो शख़्स.

एक ऐसे देश की कमान उनके हाथ में थी, जिसे 'आतंकवाद' के ख़िलाफ़ बड़ी लड़ाई में काफ़ी अहम माना जाता था. लेकिन समय बदला और ऐसा बदला कि देश-दुनिया का सबसे चर्चित चेहरा पृष्ठभूमि में चला गया.

पृष्ठभूमि भी ऐसी कि न उनके बारे में ख़बरे आ रही हैं और न ही ख़ुद वे कुछ बोल रहे हैं. उनके न बोलने की बात भी समझ में आती है. लेकिन उनके बारे में लोगों की जिज्ञासाएँ कम नहीं. क्या सोचते होंगे परवेज़ मुशर्रफ़?

जैसा कि पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार मारियाना बाबर कहती हैं- मैरियट होटल में धमाके के बाद वे ये ज़रूर सोच रहे होंगे कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई उन्होंने क्यों ठीक तरीक़े से नहीं लड़ी. उनके कार्यकाल में तो चरमपंथ बढ़ा.

मुशर्रफ़ साहब को संगीत का बड़ा शौक है. उनके पास बहुत अच्छे-अच्छे कलेक्शन हैं. और कई बार उन्होंने मुझे ये कलेक्शन सुनने के लिए दिया भी है. उन्हें ग़ज़लों का ज़्यादा शौक हैं. लेकिन वे भारतीय संगीत भी सुनते हैं. सूफ़ी भी सुनते हैं और लोकगीतों में भी उनकी रुचि है. भारतीय गानों में उन्हें आजकल के लारा लप्पा वाले गाने नहीं भाते. वे पुराने गाने बहुत रुचि से सुनते हैं और उन्हें केएल सहगल के गाने काफ़ी पसंद हैं
ख़ैर तो ये हुआ एक अलग पक्ष. मुशर्रफ़ के कार्यकाल और उनके चरित्र की व्याख्या तो समय-समय पर होती ही रहेगी.

लेकिन हम उन लोगों की जिज्ञासा को शांत करने की कोशिश करते हैं जो ये जानना चाहते हैं कि एक समय पाकिस्तान के शीर्ष पद कर रहने वाला शख़्स क्या कर रहा है, कैसे समय बिता रहा है, उसे देश-दुनिया की कितनी फ़िक्र है.

यही सब जानने के लिए मैंने संपर्क किया हुमायूँ गौहर से. हुमायूँ गौहर कई अख़बारों में कॉलम लिखते हैं और पद छूटने के बाद भी परवेज़ मुशर्रफ़ से नियमित संपर्क में रहते हैं. मिलते हैं, उनके साथ बात करते हैं, बहस में शिरकत करते हैं और चिंताओं पर भी चर्चा करते हैं.

परवेज़ मुशर्रफ़ की किताब लिखने में उन्होंने बहुत मदद की. कहा तो ये भी जाता है कि किताब के असली लेखक वही है. चलिए आपको बताते हैं 'रिटायर्ड' परवेज़ मुशर्रफ़ के जीवन के कुछ पहलू हुमायूँ गौहर के हवाले से.

**************************************************************

मेरा पहला सवाल यही था- कैसी चल रही है मुशर्रफ़ साहब की ज़िंदगी.

जवाब था- उनकी ज़िंदगी सामान्य चल रही है. वे जिस घर में रहते थे, उसी में रह रहे हैं. वे दिसंबर तक रावलपिंडी के आर्मी हाउस में ही रहेंगे और उम्मीद है कि जनवरी से वे इस्लामाबाद में अपने घर में चले जाएँगे.

अब ताम-झाम से पूरी तरह दूर हैं मुशर्रफ़

इस्लामाबाद में उनका घर तैयार हो रहा है. उनका मूड बहुत अच्छा है. वो आराम कर रहे हैं. ज़िंदगी में पहली बार उन्हें आराम करने का मौक़ा भी मिला है.

उनके यहाँ लोगों का आना-जाना लगा हुआ है. इसलिए वे थोड़ा व्यस्त भी रहते हैं. लोगों से मिलने-जुलने में. आजकल रमज़ान है तो रमज़ान का भी एक कार्यक्रम होता है और शाम को लोगों के साथ मिलना-जुलना भी.

आजकल वे अपनी पुरानी चीज़ों को इकट्ठा करने में भी लगे हैं. नए घर में अपने को व्यवस्थित करने की कोशिश में लगे हुए हैं. वे बिल्कुल मज़े से हैं. सुकून से हैं.

उनके चाहने वाले बहुत हैं. उन्हें कोई परेशानी नहीं है. वे अपनी किताब भी पूरा करने की कोशिश करेंगे. उनकी आत्मकथा अभी बीच में ही रुकी हुई है.

हमारे यहाँ जो एक पूर्व राष्ट्रपति को सारी सुविधाएँ मिलती हैं, वो मुशर्रफ़ साहब को मिली हुई हैं. उन्हें सुरक्षा मिली हुई है, उन्हें बुलेट प्रूफ़ गाड़ी दी गई है.

सरकार पूर्व राष्ट्रपति को देश में कहीं भी एक जगह घर देती है. लेकिन मुशर्रफ़ साहब ने सरकार से घर नहीं लिया है. घर में उनके लिए जो काम कर रहे हैं, वे उनके अपने कर्मचारी हैं.

******************************************************************

मैंने उनसे पूछा- ख़ाली समय में क्या करते हैं?

उन्होंने बताया- ऐसा नहीं है कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उनके जीवन में ख़ालीपन आ गया है. परवेज़ मुशर्रफ़ एक ऐसा आदमी है जिसकी कई दिलचस्पियाँ हैं.

परवेज़ मुशर्रफ़ वैसे रिटायर्ड नौकरशाह की तरह नहीं जो ये सोचते रहते हैं कि अब मैं क्या करूँ. मुशर्रफ़ साहब अपने काम में व्यस्त रहते हैं. उनकी एक दिनचर्या है. कई देशों के प्रधानमंत्री या प्रमुख उन्हें फ़ोन करते रहते हैं
परवेज़ मुशर्रफ़ वैसे रिटायर्ड नौकरशाह की तरह नहीं जो ये सोचते रहते हैं कि अब मैं क्या करूँ. मुशर्रफ़ साहब अपने काम में व्यस्त रहते हैं. उनकी एक दिनचर्या है. कई देशों के प्रधानमंत्री या प्रमुख उन्हें फ़ोन करते रहते हैं.

उनके कई निजी काम हैं. वे पढ़ते हैं, लिखते हैं. ऐसा नहीं कि अब आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई या विदेश नीति से अलग हो गए तो कोई काम ही नहीं.

अमरीका के अलावा मध्य पूर्व के देशों और कई अन्य जगहों से उन्हें लेक्चर देने की पेशकश भी आ रही है.

******************************************************************

किस तरह की चर्चाएँ होती हैं.

हुमायूँ गौहर- इतना ज़रूर है कि वे पाकिस्तान की राजनीति के बारे में ऊपर-ऊपर की बातें ही करते हैं. ज़्यादा वे दुनिया की स्थिति के बारे में बातें करते हैं.

आख़िरी समय में मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ विरोध बढ़ गया था

कुछ दिन पहले जिनेवा में जो प्रयोग शुरू हुआ था, उन्होंने उस बारे में ख़ूब रुचि ली. उस पर मुशर्रफ़ साहब के साथ हमने ख़ूब बातें की. फिर हम लोगों ने एक वैज्ञानिक को बुला लिया और कहा कि ज़रा हमें इस बारे में समझाओ.

मुशर्रफ़ साहब ख़ुद जिनेवा जा चुके हैं. प्रयोगशाला भी वे गए हैं जहाँ क़रीब 10 पाकिस्तानी भी काम कर रहे हैं. फिर हमने इस पर चर्चा की कि ये ब्लैक होल क्या होता है. काफ़ी देर तक हम उन प्रयोगों के बारे में बात करते रहे.

दुनियाभर के वित्तीय बाज़ार में जो आर्थिक मंदी आई है, उस पर भी हमलोगों ने कई बार विचार-विमर्श किया. हमने फ़्री मार्केट पर बात की और बैंकिंग व्यवस्था पर भी अच्छी ख़ासी बहस की.

परिवार को समय दे रहे हैं अब मुशर्रफ़ साहब

जवाब- अब वे परिवार को भी ज़्यादा समय दे पा रहे हैं. उनकी माँ उनके साथ रहती हैं. उनकी बेटी कराची में व्याही गई हैं और आजकल मुशर्रफ़ साहब वहीं गए हुए हैं.

उनका एक बेटा अभी अमरीका में नौकरी कर रहा है. पहले वो चीन में था लेकिन अब अमरीका चला गया है. इनके दोनों भाई भी विदेश में रहते हैं. वैसे इनका परिवार छोटा है.

******************************************************************

दिनचर्या क्या है और उनके शौक क्या हैं?

जवाब- राष्ट्रपति पद पर रहते और अब पद से हटने के बाद भी उनकी दिनचर्या बहुत नियमित हैं. सुबह वे आठ बजे से पहले उठ जाते हैं और फिर स्विमिंग करते हैं. 10 बजे तक वे बिल्कुल तैयार हो जाते हैं.

कुछ दिन पहले जिनेवा में जो प्रयोग शुरू हुआ था, उन्होंने उस बारे में ख़ूब रुचि ली. उस पर मुशर्रफ़ साहब के साथ हमने ख़ूब बातें की. फिर हम लोगों ने एक वैज्ञानिक को बुला लिया और कहा कि ज़रा हमें इस बारे में समझाओ. मुशर्रफ़ साहब ख़ुद जिनेवा जा चुके हैं. प्रयोगशाला भी वे गए हैं जहाँ क़रीब 10 पाकिस्तानी भी काम कर रहे हैं. फिर हमने इस पर चर्चा की कि ये ब्लैक होल क्या होता है. काफ़ी देर तक हम उन प्रयोगों के बारे में बात करते रहे
शाम को वे थोड़ा समय टेनिस खेलने में भी लगाते हैं. वे कसरत पर भी समय देते हैं. इसलिए अभी तक वे काफ़ी फ़िट हैं. पहले वे स्क्वैश भी खेलते थे. लेकिन अब उन्होंने ये छोड़ दी है.

मुशर्रफ़ साहब को संगीत का बड़ा शौक है. उनके पास बहुत अच्छे-अच्छे कलेक्शन हैं. और कई बार उन्होंने मुझे ये कलेक्शन सुनने के लिए दिया भी है.

उन्हें ग़ज़लों का ज़्यादा शौक हैं. लेकिन वे भारतीय संगीत भी सुनते हैं. सूफ़ी भी सुनते हैं और लोकगीतों में भी उनकी रुचि है. भारतीय गानों में उन्हें आजकल के लारा लप्पा वाले गाने नहीं भाते.

वे पुराने गाने बहुत रुचि से सुनते हैं और उन्हें केएल सहगल के गाने काफ़ी पसंद हैं.

******************************************************************

राजनीति में उनकी कुछ भूमिका हो सकती है आगे

हुमायूँ गौहर-पाकिस्तानी राजनीति में उनकी भूमिका मुझे फ़िलहाल तो नज़र नहीं आती. उनको अगर राजनीति में आने का शौक रहता तो जब वे राष्ट्रपति थे तभी आ सकते थे.

फ़िलहाल अपनी ज़िंदगी से ख़ुश हैं मुशर्रफ़

क्या कभी मुशर्रफ़ साहब के ख़िलाफ़ भी मुक़दमेबाज़ी हो सकती है, ऐसा वे नहीं सोचते. देखिए मुशर्रफ़ साहब आर्मी से जुड़े हुए थे. उन्हें इस बात का डर बिल्कुल नहीं.

उन्होंने नवाज़ शरीफ़ हों या बेनज़ीर भुट्टो- अपने रहते इन्हें वतन वापस आने दिया. आसिफ़ अली ज़रदारी को भी मुशर्रफ़ साहब के रहते ही जेल से रिहा किया गया.

मुशर्रफ़ साहब ने इन सब चीज़ों को बदलने की कोशिश की है कि पूर्व शासकों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता. ये बहुत शुरुआती समय है कि मुशर्रफ़ साहब ये सोचें कि जिन्हें उन्होंने वापस वतन आने दिया, उन्हीं लोगों ने उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर किया.

मुझे लगता है कि उन्हें ये बातें आने वाले समय में लगेंगी ज़रूर.

******************************************************************

वरिष्ठ पत्रकार मारियाना बाबर कहती हैं- मुशर्रफ़ के अधीन पाकिस्तान में काली रातें थी. परवेज़ मुशर्रफ़ बहुत कुछ कर सकते थे. लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया. उन्होंने बहुत सुनहरा मौक़ा अपने हाथ से जाने दिया.

इस पर बहस होती रहेगी कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने क्या किया, क्या नहीं किया. लेकिन हुमायूँ गौहर के शब्दों में फ़िलहाल तो परवेज़ मुशर्रफ़ अच्छे मूड में हैं और सामान्य ज़िंदगी बिता रहे हैं.

ये तो आने वाला समय ही बताएगा कि पाकिस्तान के इतिहास में परवेज़ मुशर्रफ़ के लिए कैसी जगह बनती है.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more