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उमा भारती महाभारत के अर्जुन की तरह लडेंगी चुनावी युद्घ (लीड-1)

By Staff
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भोपाल, 22 सितंबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व भारतीय जनशक्ति (भाजश) की अध्यक्ष उमा भारती सूबे के आगामी विधानसभा चुनाव को धर्म युद्घ मानकर चल रही हैं। इस युद्घ में उन्हें उन लोगों से मुकाबला करना है, जो कभी उनके हुआ करते थे। इसलिए वे इस चुनावी युद्घ को 'महाभारत' का प्रतीक मानकर चल रही हैं, जिसमें वे अर्जुन की तरह मुकाबला करेंगी। भले ही इसके लिए उन्हें अपनों के ही सिर क्यों न कलम करना पड़े।

भोपाल, 22 सितंबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व भारतीय जनशक्ति (भाजश) की अध्यक्ष उमा भारती सूबे के आगामी विधानसभा चुनाव को धर्म युद्घ मानकर चल रही हैं। इस युद्घ में उन्हें उन लोगों से मुकाबला करना है, जो कभी उनके हुआ करते थे। इसलिए वे इस चुनावी युद्घ को 'महाभारत' का प्रतीक मानकर चल रही हैं, जिसमें वे अर्जुन की तरह मुकाबला करेंगी। भले ही इसके लिए उन्हें अपनों के ही सिर क्यों न कलम करना पड़े।

राजधानी के लाल परेड मैदान में आयोजित सुराज संकल्प रैली में उमा भारती ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की जा रही नित नई-नई घोषणाओं पर सवाल खड़े किए और कहा कि सरकार के पास पैसा नहीं है, फिर भी घोषणाओं की बरसात जारी है। इसके चलते प्रदेश में आर्थिक आपातकाल की स्थिति निर्मित हो गई है।

श्रीमद् भागवत गीता के दृष्टान्त और लोमड़ी की प्रचलित कहानी का जिक्र करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर करारे प्रहार किए। महाभारत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अर्जुन अपने सामने खड़ी कौरवों की सेना में अपने ही लोगों को देखकर विचलित हो गया था।

उमा ने कहा कि उनकी भी स्थिति अर्जुन की ही तरह है। जिनसे उन्हें लड़ना है वे कभी उनके साथी रहे हैं और ताकतवर भी हैं। उन्होंने मौजूद भीड़ को कृष्ण के विराट रूप की संज्ञा देते हुए कहा कि उन्हें लग रहा है कि वे समाज विरोधियों और अधर्मियों से लड़ाई लड़ने में सफल होंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके पास पार्टी के लोग कृष्ण की तरह सारथी जो हैं।

उमा भारती ने एक लोमड़ी की भी कहानी सुनाई, जिसे परछाई में अपनी आकृति देखकर खुद के शेर होने का भ्रम हो जाता है और रौशनी कम होने पर जब अपनी परछाई छोटी दिखती है तो उसे हकीकत का एहसास होता है। उन्होंने कहा कि यही स्थिति भाजपा की है। भाजपा ने प्रदेश की सत्ता जब संभाली थी, तब वह खुद को शेर मानती थी मगर अब उसे अपनी हकीकत का एहसास हो गया है।

उमा ने प्रदेश सरकार की हर मुद्दे पर खिंचाई की। उन्होंने कहा कि प्रदेश पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। जिन योजनाओं के लिए कर्ज लिया जा रहा है, उसे खर्च न करके उसकी बंदरबांट की जा रही है। इतना ही नहीं सरकार घोषणाओं पर घोषणाएं किए जा रही है मगर उसके खजाने में धनराशि ही नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि बढ़ती विसंगतियों के कारण मध्यप्रदेश जल्दी ही आर्थिक तौर पर दिवालिया न हो जाए।

उन्होंने आगे कहा कि इसी लाल परेड मैदान पर लालकृष्ण आडवाणी ने उन्हें बतौर नेता प्रस्तुत करके पिछला विधानसभा चुनाव लड़ा था। प्रदेश की जनता ने उनका साथ दिया था। परिणामस्वरूप प्रदेश में भाजपा सत्ता में आई थी। आज उसी पार्टी और सरकार में ऐसे लोगों ने कमान संभाल रखी है जिनके चेहरे और चरित्र पर सवाल उठ रहे हैं।

आगामी विधानसभा चुनावों में वर्तमान सरकार को उखाड़ फेंकने और कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने का आह्वान करते हुए उन्होंने लोगों से प्रदेश की कमान उनके हाथ में सौपने का आह्वान किया। आरोप पत्र जारी करते हुए उन्होंने कहा कि शायद राजनीति में यह पहला मौका होगा जब किसी नेता को अपने द्वारा बनाई गई सरकार को ही कटघरे में खड़ा करना पड़ रहा है। इसके लिए वे सीधे तौर पर आडवाणी को जिम्मेदार मानती हैं।

सपा से बढ़ती नजदीकियों को उन्होंने स्वीकारा और कहा कि वे भाजपा और कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता से दूर रखने में कोई कसर नहीं छोडें़गी।

लाल परेड मैदान पर आमसभा से पहले काली मंदिर से रैली शुरू हुई जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। यह रैली लाल परेड मैदान पहुंचकर आम सभा में तब्दील हो गई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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