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बुश ने आपात वित्तीय योजना की तैयार की

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राष्ट्रपति बुश का कहना है कि अर्थव्यवस्था अभूतपूर्व संकट का सामना कर रही है
राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि अमरीका अर्थव्यवस्था के अभूतपूर्व संकट के लिए अभूतपूर्व क़दम उठाने जा रहा है. उन्होंने इस योजना के लिए समर्थन मांगा है.

साथ ही उन्होंने कहा है कि इसमें ख़तरा तो है क्योंकि डूबे हुए कर्ज़ों के लिए करोड़ों डालर का बोझ आयकर दाताओं पर पड़ेगा. लेकिन इस ख़तरे को न उठाना और भी बड़ा ख़तरा होगा.

लेकिन राष्ट्रपति बुश का कहना था कि इसके अलावा कोई चारा भी नहीं है.अमरीकी वित्त मंत्रालय कांग्रेस में अपनी उस योजना का ब्यौरा भेजनेवाला है जिसमें शेयर बाज़ारों के मौजूदा संकट से निकालने के रास्ते सुझाए गए हैं.

अमरीकी अर्थव्यवस्था एक अभूतपूर्व चुनौती का सामना कर रही है और हमें उस चुनौती का सामना करने के लिए अभूतपूर्व क़दम उࢠाने पड़ रहे हैं
राष्ट्रपति बुश ने इस प्रस्ताव के अंतर्गत एक नई सरकारी बीमा योजना का ब्यौरा दिया है.इसमें कुछ म्यूचुअल फंडों के लिए गारंटी, शॉर्ट सेलिंग पर पाबंदी, बैकों के लिए केंद्रीय बैंक से आपातकालीन ऋण की सहूलियत और वित्तीय संकट से जूझ रहे संस्थानों के लिए एक तरह से राष्ट्रीयकरण की व्यवस्था की जाएगी.

राष्ट्रपति बुश का कहना था,'' अमरीकी अर्थव्यवस्था एक अभूतपूर्व चुनौती का सामना कर रही है और हमें उस चुनौती का सामना करने के लिए अभूतपूर्व क़दम उठाने पड़ रहे हैं.''

ग़ौरतलब है कि अमरीका के वित्तीय बाज़ार में ये संकट तब पैदा हुआ जब आवासीय ऋणों की वसूली से जूझ रहे लीमैन ब्रदर्स ने ख़ुद को दिवालिया घोषित कर दिया जबकि मेरिल लिंच को एक अन्य प्रमुख कंपनी ने ख़रीद लिया.

अरबों डॉलर खो चुके लीमन ब्रदर्स के दिवालिया होने की ख़बर का दुनियाभर के शेयर बाज़ारों पर असर हुआ.

वित्तीय संकट

दरअसल, अमरीकी वित्त बाज़ार 1930 की आर्थिक मंदी के बाद से अब तक के सबसे बड़े बैंकिंग संकट का सामना कर रहा है.

इसमें ख़तरा तो है क्योंकि डूबे हुए कर्ज़ों के लिए करोड़ों डालर का बोझ आयकर दाताओं पर पड़ेगा. लेकिन इस ख़तरे को न उࢠाना और भी बड़ा ख़तरा होगा.
लीमन ब्रदर्स बैंक से व्यापार करने वाली दुनिया भर की वित्तीय संस्थाएँ अरबों डॉलर का नुक़सान उठाने के कगार पर हैं. इसके बाद दुनियाभर के शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट आई.

वित्तीय बाज़ारों की इस गिरावट को थामने के लिए कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने एक संयुक्त कार्रवाई के तहत धन की सप्लाई बढ़ाने का फ़ैसला करना पड़ा.

इस घोषणा के बाद विश्व के शेयर बाज़ारों में कुछ स्थिरता आई है. हालाँकि पर्यवेक्षकों के मुताबिक बाज़ार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है. ये सारे लक्षण अर्थव्यवस्था और बाज़ारों की चिंता को बढ़ा रहे हैं.

सबकी निगाहें अमरीकी प्रशासन पर लगी हुईं हैं कि वह कितनी दक्षता के साथ इस संकट को संभालता है क्योंकि अगर स्थिति संभली नहीं तो दुनिया के शेयर बाज़ार एक गंभीर संकट की ओर बढ़ सकते हैं.

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