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    सिंगुर मसले पर अब और रियायत नहीं : बुद्धदेब (राउंडअप इंट्रो-1)

    By Staff
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    कोलकाता, 20 सितम्बर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने टाटा मोटर्स के नैनो परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मुद्दे पर और रियायत देने से साफ इनकार करते हुए शुक्रवार को कहा कि अब यह मसला तभी सुलझ सकता है जब विपक्ष ताजा मुआवजा पैकेज स्वीकार कर ले।

    उधर प्रमुख विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी से मुलाकात कर उनसे सरकार के साथ हुए सिंगुर समझौते को अमल में लाने की मांग की है।

    इस बीच पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता ज्योति बसु ने विपक्ष से अपील की है कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता छोड़कर 'टाटा मोटर्स' के विश्वस्तरीय 'नैनो परियोजना' के पक्ष में राज्य सरकार का सहयोग करें। लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी वाम मोर्चा मुआवजा पैकेज स्वीकार करने के लिए सिंगुर के किसानों पर दबाव डाल रहा है।

    राजभवन में गांधी के साथ 80 मिनट की मुलाकात के बाद ममता बनर्जी ने संवाददाताओं को बताया, "राज्यपाल ने मुझसे कहा कि उन्होंने सिंगुर से जुड़े मसले पर हमारा पक्ष सुन लिया है, अब वे राज्य सरकार से भी उनका पक्ष रखने के लिए कहेंगे।"

    गौरतलब है कि दो दिन पहले ही पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य कह चुके हैं कि सिंगुर मसले पर बातचीत में गांधी की मध्यस्थता की गुंजाइश अब नहीं रही।

    बनर्जी ने कहा कि किसानों के लिए मुआवजा पैकेज की एकतरफा घोषणा करके राज्य सरकार ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन किया है, लिहाजा उन्होंने राज्यपाल से समझौते के प्रावधानों को अमल में लाने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की मांग की है।

    उधर ज्योति बसु ने एक बयान में कहा, "मैं नैनो परियोजना का विरोध करने वाले तमाम लोगों से अपील करता हूं कि वे राजनीति से ऊपर उठकर राज्य की जनता के हित में इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरी करने में राज्य सरकार का सहयोग करें।"

    बसु ने कहा, "पश्चिम बंगाल के विकास और औद्योगिकरण के लिए कार फैक्ट्री परियोजना बहुत महत्वपूर्ण है। यदि यह परियोजना पूरी हो जाती है, तो राज्य में रोजगार सृजन के परिदृश्य में सुधार होगा।"

    उन्होंने सिंगुर के उन किसानों से भी सरकार की ओर से घोषित मुआवजा पैकेज स्वीकार करने की अपील की, जिन्होंने यह पैकेज ठुकरा दिया है और जमीन लौटाए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं।

    उन्होंने चिंता जताई कि यदि नैनो परियोजना पश्चिम बंगाल से बाहर चली गई तो इससे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की साख प्रभावित होगी। उन्होंने कहा, "दूसरी ओर यदि यह परियोजना पश्चिम बंगाल में पूरी हो जाती है, तो इससे राज्य में निवेश बढ़ेगा।"

    गौरतलब है कि कोलकाता से लगभग 40 किलोमीटर दूर हूगली जिले के सिंगुर में एक लाख रुपये कीमत वाली कार नैनो के निर्माणाधीन उत्पादन संयंत्र का काम फिलहाल ठप पड़ा है।

    इस परियोजना के लिए सरकार ने कुल 997.11 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। लेकिन तृणमूल कांग्रेस और किसानों के संगठन कृषि जमीं जिबिका रक्षा कमेटी (केजेजेआरसी) का कहना है कि इसमें से 400 एकड़ जमीन किसानों से उनकी मर्जी के खिलाफ ली गई है, लिहाजा यह जमीन उन्हें लौटा दी जानी चाहिए।

    सत्ताधारी वाम मोर्चे ने किसानों की मांग मानने से इंकार कर दिया है और उनके लिए मुआवजे के नए पैकेज की घोषणा की है, लेकिन ज्यादातर किसानों ने यह पैकेज स्वीकार करने से मना कर दिया है।

    इस बीच टाटा मोटर्स एक लाख रुपये कीमत वाली नैनो कार का उत्पादन संयंत्र पश्चिम बंगाल से बाहर कहीं दूसरी जगह ले जाने का विकल्प तलाश रही है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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