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पोटा जैसा क़ानून नहीं, कई नए उपाय

By Staff
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दिल्ली में हुए विस्फोट के बाद केंद्र सरकार पर चरमपंथ से निपटने के लिए दबाव बढ़ गया है
भारत सरकार ने 'आतंकवाद' से निपटने के लिए पोटा जैसे कोई क़ानून लाने से इनकार करते हुए मौजूदा तंत्र में सुधार के लिए कई उपायों की घोषणा की है.

इसमें पुलिस के आधुनिकीकरण, अनुसंधान और विश्लेषण के लिए एक नया प्रकोष्ठ बनाने और महानगरों की सुरक्षा के लिए नए उपाय अपनाना शामिल है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में पिछले शनिवार को राजधानी में हुए विस्फोटों के बाद देश में क़ानून व्यवस्था की स्थिति का आकलन किया गया और इन उपायों को मंज़ूरी दी गई.

सरकार की इस घोषणा के साथ मीडिया की सभी अटकलें ग़लत साबित हो गई हैं जिसमें नए सख़्त क़ानून और 'आतंकवाद' से निपटने के लिए एक अलग मंत्रालय बनाए जाने जैसी बातें कही जा रही थीं.

मंगलवार को प्रशासनिक सुधार आयोग की इस सिफ़ारिश के साथ ये अटकलें शुरु हुई थीं कि 'आतंकवाद' से निपटने के लिए सख़्त क़ानून की ज़रूरत है.

लगातार हो रहे चरमपंथी हमलों के चलते मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी पोटा जैसे सख़्त क़ानून की ज़रूरत पर ज़ोर देती रही है जबकि केंद्र में सत्तारूढ़ यूपीए के घटक दल इस क़ानून को अनावश्यक मानते हैं.

हालांकि दिल्ली में हुए विस्फोटों के बाद से कांग्रेस के नेता भी कड़े क़ानून की बात कर रहे हैं.

'मौजूदा क़ानून पर्याप्त'

बुधवार को मंत्रिमंडल में लिए गए फ़ैसलों की जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने कहा कि पोटा जैसे किसी सख़्त क़ानून की ज़रूरत नहीं है.

हमारे कुछ क़ानून तो अमरीका और ब्रिटेन के क़ानूनों से ज़्यादा सख़्त हैं
उन्होंने कहा, "यह (पोटा जैसा क़ानून) बहुत कठोर है और मानवाधिकार के ख़िलाफ़ है. यदि मौजूदा क़ानून को ठीक तरह से लागू किया जाए, तो किसी और क़ानून की ज़रूरत नहीं है."

उनका कहना था, "हमारे कुछ क़ानून तो अमरीका और ब्रिटेन के क़ानूनों से ज़्यादा सख़्त हैं."

यह पूछे जाने पर कि गृहमंत्री शिवराज पाटिल के प्रदर्शन से जुड़े किसी मसले पर भी क्या मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा हुई, उन्होंने कहा, "ऐसा कुछ नहीं हुआ."

उपाय

इससे पहले गृह सचिव मधुकर गुप्ता ने 'आतंकवाद' से निपटने के लिए उठाए जाने वाले क़दमों की जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि तकनीक को विकसित करने, अनुसंधान और विश्लेषण के लिए एक विशेष प्रकोष्ठ की स्थापना को मंज़ूरी दी गई है.

पुलिस सुधारों और आधुनिकीकरण का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों में 'आतंकवाद' से निपटने के लिए विशेष बल बनाए गए हैं उन्हें मज़बूत बनाया जाएगा और अब ख़ुफ़िया तंत्र में सुधार किए जाएँगे.

केंद्रीय गृहमंत्रालय ने पुलिस सुधार की बात दोहराई है

महानगरों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास किए जाने की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी. इस कार्ययोजना को तैयार करने की ज़िम्मेदारी अनुसंधान और विकास विभाग के महानिदेशक और महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक तैयार करेंगे.

गृहसचिव के अनुसार केंद्र सरकार ने दिल्ली की तरह और राज्यों में भी सुरक्षा के कार्यों में आम नागरिक को शामिल करने की वकालत की है और कहा है कि राज्य पुलिस को इस तरह के कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए.

उन्होंने दिल्ली में अतिरिक्त पुलिस बल की भर्ती, पुलिस को अतिरिक्त वाहन दिए जाने की भी घोषणा की है.

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