• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

भारत में नौकरियों पर मँडराता ख़तरा

By Staff
|
माना जा रहा है कि अमरीकी वित्तीय संकट से भारत अछूता नहीं रह पाएगा
अमरीकी वित्तीय क्षेत्र की दिग्गज कंपनियाँ की मुश्किलों का सीधा असर भारत पर पड़ेगा. भारत में ढेर सारी नौकरियों पर भारी ख़तरा मँडरा रहा है.

इन कंपनियों में काम कर रहे लोगों की नौकरी पर संकट में है. मसलन, भारत में लीमैन ब्रदर्स से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लगभग ढाई हज़ार लोग जुड़े हुए हैं.

बैंकिंग, फ़ाइनेंस और इंश्योरेंस सेक्टर (बीएफ़आई) क्षेत्र भारतीय सूचना तकनीक उद्योग को लगभग 40 फ़ीसदी धंधा उपलब्ध कराता है.

उस पर अमरीकी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के डूबने का सीधा असर पड़ेगा.

ख़बरें हैं कि इस बार एमबीए और इंजीनियरिंग कॉलेजों में चयन के लिए विदेशी कंपनियाँ कम आ रही हैं.

हमने हाल में नौकरी के अवसरों के संबंध में एक सर्वे किया था. उसमें वित्त और इंश्योरेंस क्षेत्र में नौकरियों में भारी कमी का आकलन किया गया था
बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड टेक्नॉलाजी के निदेशक डॉक्टर हरिवंश का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं कि अमरीका के इस आर्थिक संकट से रोज़गार के अवसर प्रभावित होंगे.

उनका कहना था कि वित्तीय क्षेत्र में सक्रिय भारतीय कंपनियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, ज़ाहिर है कि ये कंपनियाँ मैनेजमेंट संस्थानों से कम लोगों की भर्ती करेंगी.

कम्युनिकेशंस कंसलटेंट राजीव सक्सेना कहते हैं कि अनुमान के मुताबिक़, 20 से 25 हज़ार नौकरियों में कमी आएगी.

वो बताते हैं कि बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में दो तरह के लोग होते हैं. एक तो वे जो सामान्य रूप से काम कर रहे होते हैं.

दूसरे ऐसे लोग होते हैं जो रिज़र्व स्टॉफ होते हैं, किसी बड़ी परियोजना के एकाएक हाथ लगने पर वो सक्रिय होते हैं. ऐसे लोगों पर सबसे पहले गाज गिरेगी.

अवसरों पर असर

इस संकट से नई संभावनाओं पर ख़ासा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

वित्तीय क्षेत्र में सक्रिय भारतीय कंपनियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, ज़ाहिर है कि ये कंपनियाँ मैनेजमेंट संस्थानों से कम लोगों की भर्ती करेंगी
कोरपोरेट प्रोफ़ेशनल्स के प्रबंध निदेशक पवन विजय कहते हैं कि आर्थिक माहौल ख़राब होने से भविष्य की सभी योजनाएँ रुक जाती हैं.

वो कहते हैं कि बाज़ार में नए इश्यू नहीं आ रहे हैं जिससे बही खाते सही करने, कंपनियों के विलय और मार्केटिंग के काम बंद हैं और इसका असर निश्चित रूप से नौकरियों पर पड़ेगा.

पर ऐसा नहीं कि इस संकट में कोई आशा की किरण नहीं है.

माना जा रहा है कि अमरीका में वित्तीय संकट से जूझ रही कंपनियों को अपने खर्चों में भारी कटौती करनी पड़ेगी, नतीजतन उन्हें आउटसोर्सिंग करनी पड़ेगी.

सलाहकार राजीव सक्सेना का कहना है कि भारतीय बीपीओ प्रयोग सफल रहा है और उन्हें इस संकट से लाभ हो सकता है.

मैनपॉवर सर्विसेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉक्टर नरेश मल्हान का भी कहना है, ''हमने हाल में नौकरी के अवसरों के संबंध में एक सर्वे किया था. उसमें वित्त और इंश्योरेंस क्षेत्र में नौकरियों में भारी कमी का आकलन किया गया था.''

उनका कहना था कि हमें लगता है कि इस साल के अंत तक वित्त और इंश्योरेंस क्षेत्र में मंदी का दौर रहेगा और नौकरियों पर संकट रहेगा, लेकिन भारत फिर भी रोज़गार की दृष्टि से बेहतर स्थान बना रहेगा.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more