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रैनबैक्सी की 30 दवाओं पर अमरीका में रोक

By सलीम रिज़वी
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अधिकारियों का कहना है कि यह प्रतिबंध स्थाई नहीं है
भारत की दवा कंपनी रैनबैक्सी की 30 दवाओं पर अमरीकी प्रशासन ने इसलिए प्रतिबंध लगा दिया है क्योंकि उनका निर्माण साफ़-सफ़ाई के साथ नहीं हुआ.

अमरीका ने रैनबैक्सी द्वारा बनाई गई कुल 30 दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है.

अमरीका की दवाओं को नियमित करने वाली सरकारी संस्था फ़ेडरल ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन या एफ़डीए ने आरोप लगाया है कि रैनबैक्सी कंपनी के कारखानों में दवा बनाते समय उचित साफ़ सफ़ाई नहीं रखी जाती.

इन दवाओं में भारी मात्रा में प्रयोग की जाने वाली दवाएँ जैसे सिप्रो, एलावर्ट और क्लैरिटिन भी शामिल हैं, जिन्हें हृदय रोग, मधुमेह और विभिन्न प्रकार के दर्दनाशक के रुप प्रयोग किया जाता है.

अभी इस पर रैनबैक्सी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

कमियाँ

एफ़डीए के अधिकारी इस साल मार्च महीने में रैनबैक्सी के कारखानों में जांच पड़ताल करने भारत पहुंचे थे.

अधिकारियों का आरोप है कि रैनबैक्सी के देवास और पाँवटा साहिब में स्थित दो कारखानों में दवा बनाते समय अमरीका के सरकारी मांदंडों के मुताबिक उपकरणों की साफ़ सफ़ाई नहीं रखी जाती.

अमरीका का यह भी कहना है कि इन कारखानो में जब दवा तैयार की जाती है तो उन दवाओं के मिश्रण और उन मिश्रणों की मात्रा को तय करने के लिए भी नियमित रूप से देखरेख नहीं की जाती.

इसके अलावा अधिकारियों ने इन दोनों कारखानों में दवा बनाने से संबंधित बही खातों में भी खामियां पाई हैं.

एफ़डीए ने रैनबैक्सी के मुखिया मलविदर सिंह को उनके गुड़गाँव के दफ़्तर के पते पर नोटिस भेजा है जिसमें उनके कारखानों में होने वाली कथित कमियों का विवरण भी दिया गया है.

एफ़डीए का कहना है कि कंपनी अगर अनुरोध करेगी तो फिर से जांच पड़ताल का सिलसिला शुरू किया जा सकत है और फिर वहाँ बनाई गई दवाओं को अमरीका में लाए जाने की इजाज़त भी दी जा सकती है.

नुक़सानदेह नहीं

हालांकि अमरीकी अधिकारियों ने कहा है कि इन कारखानों में बनाई गई दवाओं में कोई खामी नहीं मिली है और अमरीकी बाज़ार में मौजूद रैनबैक्सी की दवाओं का उपयोग किया जा सकता है.

हमें ऐसे कोई सबूत नहीं मिलें हैं कि इन दो फ़ैक्ट्रियों में बनाई गई दवाओं के सेवन से अमरीका में लोगों को कोई नुक़सान होगा. इसलिए इन दवाईयों के सेवन से किसी को कोई खतरा नहीं है

एफ़डीए के सह-निदेशक डगलस थ्राकमार्टन का कहना है, "हमें ऐसे कोई सबूत नहीं मिलें हैं कि इन दो फ़ैक्ट्रियों में बनाई गई दवाओं के सेवन से अमरीका में लोगों को कोई नुक़सान होगा. इसलिए इन दवाईयों के सेवन से किसी को कोई खतरा नहीं है."

अमरीका में भारत से निर्यात की जाने वाली दवाओं का विभिन्न रोगों से पीड़ित लाखों लोग नियमित तौर पर सेवन करते हैं.

सिर्फ़ पिछले साल ही भारत से करीब छह अरब डॉलर की दवाएँ अमरीका निर्यात की गई थीं.

इसकी वजह से 30 दवाओं पर प्रतिबंध लग जाने से लोगों में परेशानी भी देखने में आ रही है.

लेकिन एफ़डीए ने एलान किया है कि जो लोग बाज़ार में उपलब्ध दवाओं का सेवन करें वह अपने डॉक्टर से भी राय ले लें.

एफ़डीए ने यह भी कहा है कि 'गैंकिक्लोविर' नाम के कैप्सूल पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा रहा है क्योंकि यह दवा सिर्फ़ रैनबैक्सी कंपनी ही बनाती है और इससे किल्लत पैदा हो सकती है.

इस दवा का इसतेमाल एचआईवी की रोकथाम के लिए किया जाता है.

पिछले साल फ़रवरी में अमरीका के न्यूजर्सी स्थित रैनबैक्सी कंपनी के कई दफ़्तरों पर अमरीकी न्याय विभाग ने छापे मारे गए थे और उस मामले में न्याय विभाग धोखाधड़ी से संबंधित केस में अब भी जांच जारी रखे हुए है.

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