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नए सिरे से परिभाषित हों रिश्ते: प्रचंड

By श्याम सुंदर
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प्रचंड इनदिनों भारत की यात्रा पर हैं
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहाल प्रचंड ने दिल्ली में कहा है कि भारत और नेपाल के रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करने की ज़रूरत है.

उनका कहना है कि भारत के नेताओं के साथ मुलाक़ात में उन्होंने ये बात स्पष्ट रूप से कही है.

भारत- नेपाल जनएकता मंच के एक विशेष कार्यक्रम में बीबीसी के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "मैने ये सब बातें सीधे-सीधे सामने रख दी हैं- नेपाल में राजनीतिक स्थायित्व, 1950 की संधि, सीमा समस्या और आर्थिक समस्याओं के बारे में और जल संसाधन से जुड़े मसले. नेपाल की शासन व्यवस्था में बड़े और ऐतिहासिक परिवर्तन आए हैं. भारत को इस तथ्य को स्वीकार कर नई परिस्थितियों में दोनों देशों के संबधों की समीक्षा करनी चाहिए. "

मैने सब बातें सीधे-सीधे सामने रख दी हैं. नेपाल की शासन व्यवस्था में बड़े और ऐतिहासिक परिवर्तन आए हैं. भारत को इस तथ्य को स्वीकार कर नई परिस्थितियों में दोनों देशों के संबधों की समीक्षा करनी चाहिए.
प्रधानमंत्री प्रचंड के साथ आए प्रतिनिधि मंडल में शामिल नेपाल के जल संसाधन मंत्री विष्णु पौडेल ने भारत के जल संसाधन मंत्री सैफ़ुद्दीन सोज़ से मुलाक़ात कर हाल में कोसी नदी से मची तबाही पर चर्चा की.

दोनों पक्षों के बीच मंत्री स्तरीय संयुक्त कार्यप्रणाली बनाने पर सहमति बनी है. इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने भी एक कार्यक्रम के दौरान इस मुद्दे पर नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड से बातचीत की.

भारत-नेपाल संबंध

प्रचंड ने कहा कि कोसी से पैदा संकट से निपटने और उसके स्थाई समाधान के लिए नेपाल हरसंभव मदद के लिए तैयार है. इस संदर्भ में सचिव स्तर की समिति की बैठक अगले महीने होगी.

हालाँकि ये समीति 2004 तक अस्तित्व में थी लेकिन तब से ये समिति निष्क्रिय पड़ी है. प्रचंड ने कहा है भारत नेपाल की अन्य संधियों की समिक्षा के साथ ही जलसंसाधन के क्षेत्र में भी दोनों देशों को बैठ कर समीक्षा करनी होगी.

पर क्या भारत उनकी इन बातों पर ग़ौर कर रहा है...इस पर उनका जवाब था, "हम 1950 से लेकर अब तक की संधियों पर पुनर्विचार करना ज़रूरी है.हम कई पुरानी संधियों की जगह नई संधियाँ लाना चाहते हैं."

भारत की तरफ से प्रतिक्रिया देते हुए भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा है कि भारत-नेपाल के रिश्ते ऐतिहासिक हैं और भारत को नेपाल को लेकर कतई कोई चिंता नही है.

जहाँ तक सवाल है रिश्तों की समीक्षा का तो दोनों देश बैठ कर आपस मे बातचीत कर सकते हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड की कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें भारत सरकार भी मानती है कि बदलते वक़्त के हिसाब से वो ठीक कह रहे हैं.

लेकिन ज़्यादातर बातें प्रचंड नेपाल की जनभावनाओं के हिसाब से कर रहे हैं.

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