• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

संप्रग ने भी मुसलमानों के लिए बहुत कुछ नहीं किया : ई. अहमद

By Staff
|

नई दिल्ली, 17 सितम्बर (आईएएनएस)। विदेश राज्य मंत्री ई. अहमद का कहना है कि केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने भी देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समाज के लिए बहुत कुछ नहीं किया। उन्होंने मुसलमानों को आरक्षण देने और उनके लिए नौकरियों की विशेष व्यवस्था किए जाने की मांग की।

नई दिल्ली, 17 सितम्बर (आईएएनएस)। विदेश राज्य मंत्री ई. अहमद का कहना है कि केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने भी देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समाज के लिए बहुत कुछ नहीं किया। उन्होंने मुसलमानों को आरक्षण देने और उनके लिए नौकरियों की विशेष व्यवस्था किए जाने की मांग की।

अहमद ने आईएएनएस से एक विशेष बातचीत में कहा कि अल्पसंख्यकों को समाज के अन्य वर्गो के बराबर खड़ा करने के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने होंगे।

उन्होंने कहा, "वैसे तो यह सरकार मुसलमानों के लिए सबसे अच्छी सरकार रही है, लेकिन वह मुसलमानों की संपूर्ण समस्या को हल नहीं कर रही है। सच्चर समिति की सिफारिशें और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 15 सूत्रीय एजेंडा भी नाकाफी है।"

अहमद का मानना है कि देश में अल्पसंख्यकों की आज जो स्थिति है वह सकारात्मक और सुदृढ़ कार्रवाई की कमी के कारण है।

उन्होंने कहा कि जब दलितों और आदिवासियों के सामाजिक स्तर में सुधार के सुझाव आते हैं तो उसके बारे में कुछ नहीं कहा जाता लेकिन जब मुसलमानों के बारे में ऐसी बातें उठती हैं तो उसे संकीर्ण मानसिकता का परिचायक बताया जाता है।

अहमद को हाल ही में एक बार फिर इंडियन युनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) का अध्यक्ष चुना गया। वे लोकसभा में अपनी पार्टी के एकमात्र प्रतिनिधि हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि अल्पसंख्यकों को यदि आरक्षण मिल जाता है तो कम से कम उन्हें प्रतिनिधित्व मिलना प्रारंभ हो जाएगा। सिर्फ भाषणबाजी से काम नहीं चलने वाला है, उन्हें जमीन पर उतारना पड़ेगा।

अहमद ने कहा कि मुसलमानों की सामाजिक स्थिति में सुधार लाना है तो उनके लिए विशेष आरक्षण की सुविधा देनी पड़ेगी और साथ ही नौकरियों की विशेष व्यवस्था भी करनी पड़ेगी।

आतंकवाद की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद के नाम पर किसी बेगुनाह को सिर्फ इसलिए सताया नहीं जाना चाहिए कि वह मुसलमान है। यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि बेगुनाहों को परेशान न किया जाए।

उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी अल्पसंख्यक संगठनों की निंदा कर सकते हैं, लेकिन इस समुदाय के साथ उन्होंने 2002 में क्या किया। क्या उसके लिए भी वे स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया (सिमी) को जिम्मेदार ठहराएंगे।

गुजरात में न जाने कितने मुसलमानों का कत्लेआम हुआ और न जाने कितनों को अपना घर द्वार छोड़कर भागना पड़ा। क्या मोदी यह कहेंगे कि यह सब सिमी की वजह से हुआ।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

**

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more