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गंगा घाटों पर जमा हुई मिट्टी से तर्पण करने वाले परेशान

By Staff
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वाराणसी, 17 सितम्बर (आईएएनएस)। पितृपक्ष में तर्पण के लिए वाराणसी के गंगा घाटों पर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को इस बार खास परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बाढ़ के कारण घाटों पर जमा हुई मिट्टी को अभी तक साफ नहीं किया जा सका है।

वाराणसी, 17 सितम्बर (आईएएनएस)। पितृपक्ष में तर्पण के लिए वाराणसी के गंगा घाटों पर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को इस बार खास परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बाढ़ के कारण घाटों पर जमा हुई मिट्टी को अभी तक साफ नहीं किया जा सका है।

यही नहीं कई घाटों पर अभी भी दलदल की स्थिति है जिससे कई लोगों के मिट्टी में धंसने का खतरा भी बना हुआ है। इन दलदली क्षेत्रों को चिन्हित करने की बात तो दूर नगर निगम का कोई भी अधिकारी घाटों का जायजा लेने भी नहीं पहुंचा। जबकि दूर दराज से तर्पण करने आये लोगों को पिंडदान करने के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि वाराणसी में पितृपक्ष के समय पिंडदान और तर्पण का खास महत्व माना जाता है। अपने पितरों को पिंडदान करने के लिए गया जाने वाले श्रद्धालु वाराणसी के घाटों पर पिंडदान और तर्पण जरूर करते हैं। मंगलवार से शुरू हुए अर्पण तर्पण के कार्यक्रम में सुबह से ही श्रद्धालु घाटों पर जुट जाते हैं, लेकिन घाटों पर जमा गंदगी और मिट्टी के अम्बार को देखकर वे सभी दुखी हो जाते हैं।

चेन्नई से पिंडदान करने के लिए आये एम. रामास्वामी ने बताया कि हमारे यहां गंगा और वाराणसी को बड़े ही श्रद्धाभाव से देखा जाता है लेकिन यहां की गंदगी और सफाई के प्रति लापरवाही देखकर हम लोग बहुत निराश हुए हैं।

यहां वषरें से पुरोहिती का काम करने वाले पं. हीरानन्द पाण्डेय ने बताया कि मिट्टी तो हर साल जमा होती है लेकिन पितृविसर्जन से पहले साफ कर दी जाती थी। ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि नगर निगम के कर्मचारी कान में तेल डाले बैठे हैं।

इधर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी इस संबंध में कोई भी बात करने से कतराते रहे। नगर स्वास्थ्य अधिकारी बी. के. सिंह ने बताया कि चूंकि इस बार पानी देर से उतरा है इसलिए अभी मिट्टी दिखाई पड़ रही है। सिंह ने बताया कि नगर निगम की तरफ से कई पम्प लगाए गए हैं, जो लगातार घाटों पर से मिट्टी हटाने का काम कर रहे हैं।

नगर निगम चाहे लाख दावे कर रहा हो लेकिन प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है, और प्रत्यक्ष यह है कि घाटों का शहर कहे जाने वाले शहर बनारस के लगभग सभी घाट मिट्टी से अभी भी ढके हुए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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