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    दुनिया के सारे बाज़ार बेहाल

    By Staff
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    हर तरफ़ गिरावट का दौर जारी रहा
    अमरीका में बड़े निवेश बैंक लीमैन ब्रदर्स का दीवाला निकलने के बाद एशियाई और यूरोपीय बाज़ारों में भारी गिरावट आई है.

    मंगलवार की सुबह एशियाई बाज़ारों में भारी गिरावट के साथ कारोबार शुरू हूआ. जापान, दक्षिण कोरिया, हॉन्गकॉन्ग के बाज़ार औंधे मुँह गिरे और कई जगह तो 6 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई.

    यूरोपीय बाज़ारों में गिरावट का ही दौर रहा, वे एशियाई देशों की तरह चारों खाने चित तो नहीं हुए लेकिन उसमें एक से ढाई प्रतिशत तक की गिरावट आई. ब्रिटेन का फुट्सी 2.44 प्रतिशत गिरा जबकि जर्मनी का डैक्स 1.58 प्रतिशत.

    कहाँ कितनी गिरावट जापान- 5 प्रतिशत हॉन्गकॉन्ग- 6 प्रतिशत दक्षिण कोरिया- 5 पाँच प्रतिशत ब्रिटेन-2.44 प्रतिशत जर्मनी-1.58 प्रतिशत भारत-0.99 प्रतिशत

    जापान का निकेई सूचकांक पाँच प्रतिशत गिरकर पाँच साल के अपने न्यूनतम स्तर पर जा पहुँचा, दक्षिण कोरिया और हॉन्गकॉन्ग के बाज़ार में छह प्रतिशत तक की कमी दिखी. शंघाई में यह गिरावट थोड़ी कम थी फिर भी तीन प्रतिशत नीचे बंद हुआ.

    गिरावट का यह दौर सिर्फ़ एशियाई और यूरोपीय देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बाज़ार भी गिरावट की चपेट से नहीं बच सके.

    भारत में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स तेज़ फिसलन के साथ खुला और दोपहर होते-होते तीन प्रतिशत का गोता लगा गया लेकिन फिर धीरे-धीरे हालत संभली, एक प्रतिशत से कम की गिरावट के साथ बाज़ार 13518 पर बंद हुआ.

    लीमैन का संकट

    अमरीकी मॉर्गेज बाज़ार की तबाही के चपेट में आकर अरबों डॉलर का घाटा उठाने वाले लीमैन ब्रदर्स की तबाही का असर पूरी दुनिया में दिख रहा है क्योंकि इस बैंक ने दुनिया भर में अरबों डॉलर की पूंजी लगाई हुई है.

    अमरीकी अर्थव्यवस्था एक बेहद कࢠिन दौर से गुज़र रही है, हमने अतीत में जो ग़लतियाँ की हैं यह उसका ख़ामियाज़ा भुगतने का समय है
    अब आशंका जताई जा रही है कि दुनिया की सबसे बड़ी निवेश कंपनियों में से एक एआईजी भी दिवालिया हो सकती है.

    अमरीका के वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन ने माना है कि "अमरीकी अर्थव्यवस्था एक बेहद कठिन दौर से गुज़र रही है, हमने अतीत में जो ग़लतियाँ की हैं यह उसका ख़ामियाज़ा भुगतने का समय है".

    उन्होंने कहा कि उन्हें अमरीकी अर्थव्यवस्था पर पक्का भरोसा है वह जल्दी ही इस संकट से उबर जाएगी.

    उन्होंने कहा कि अमरीकी सरकार ज़रूरत होने पर अहम फ़ैसले करने के लिए तैयार है लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि ये फ़ैसले क्या होंगे.

    लीमैन ब्रदर्स ने भारत की कई कंपनियों में भारी निवेश किया है.

    ख़तरा

    इंश्योरेंस कंपनी एआईजी, घरों के लिए ऋण उपलब्ध कराने वाली कंपनी वॉशिंगटन म्यूचुअल और निवेश बैंक मेरिल लिंच सबके शेयरों की क़ीमत पिछले हफ़्ते एक तिहाई तक गिर गई है.

    अगर इनके बचाव में कुछ नहीं हुआ तो वित्त बाज़ार में भरोसा और गिर सकता है.

    अब अमरीका के और बैंक 50 अरब डॉलर जुटा रहे हैं जिससे संकट में आने वाली वित्तीय कंपनियों को बचाने की कोशिश होगी. यानी एक बड़े संकट की आहट अब साफ़ सुनाई देने लगी है.

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