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भारत-नेपाल संबंधों को गति देने का समय आ गया है : प्रचंड (लीड-1)

By Staff
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नई दिल्ली, 16 सितम्बर (आईएएनएस)। नेपाली गणतंत्र के पहले प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' का कहना है कि भारत और नेपाल के संबंधों को नई गति देने का वक्त आ गया है। इसकी शुरुआत नए सिरे से की जानी चाहिए। उनका कहना है कि नेपाल, भारत के साथ बेहतर संबंधों को लेकर लालायित है।

प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली दफा भारत के दौरे पर आए प्रचंड के सम्मान में 'नेपाल इंडिया पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप फोरम' द्वारा आयोजित दोपहर भोज के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत-नेपाल संबंधों की नए सिरे से शुरुआत करने की वकालत की।

उन्होंने कहा, "हम नई शुरुआत को लेकर प्रतिबद्ध हैं। नेपाल में जो नई परिस्थितियां उभर कर सामने आई हैं और भारत में जो आर्थिक बदलाव हुए हैं, उसके मद्देनजर हम सभी प्रकार के पुराने संबंधों को भुलाकर नए नेपाल के साथ नई शुरुआत करना चाहते हैं।"

उन्होंने कहा, "अब पुराना नेपाल नहीं है। नया नेपाल अस्तित्व में है और हम लोग भारत के साथ नए संबंधों को लेकर लालायित हैं। वैसे भी समृद्ध नेपाल भारत के हित में है।"

प्रचंड ने कहा, "भारत की इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई नेताओं व मंत्रियों से उनकी मुलाकात हुई। इस दौरान बाढ़ की समस्या से लेकर सीमा से जुड़े मसले और अन्य कई आर्थिक मुद्दों पर बातचीत हुई। हमने दस वर्षो में 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। नेपाल के तराई क्षेत्र में रेल लाइन बिछाने की आवश्यकता है। हम चाहेंगे कि भारत हमें इसके लिए मदद दे।"

उन्होंने कहा कि नेपाल की जमीन को किसी भी देश के खिलाफ इस्तेमाल होने नहीं दिया जाएगा। हाल ही नेपाल सरकार ने इस बारे में नेपाली संसद में एक प्रस्ताव पारित किया है।

प्रचंड ने भावुक होकर कहा, "अपने संघर्ष के 10 वर्षो में से 8 वर्ष मैंने भारत में बिताए हैं और वह भी भूमिगत होकर। इस दौरान मुझे भारत को खूब अच्छे से समझने का मौका मिला। पीपुल्स वार का नेतृत्व करने वाला मेरे जैसा एक विद्रोही नेता इतने कम समय में इतने बड़े बदलाव का साक्षी बना। मुझे कभी-कभी यह सपना लगता है कि इतने कम समय में इतना बड़ा बदलाव कैसे हो गया।"

'नेपाल इंडिया पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप फोरम' के अध्यक्ष शरद यादव ने इस मौके पर कहा कि बिहार की जनता को हर साल बाढ़ की विभीषिका का सामना करना पड़ता है। इस विभीषिका से प्रत्येक वर्ष किसान, मजदूर व आम आदमी तबाह होते हैं। इसलिए कोसी का पानी बिहार के लोगों के लिए अभिशाप बना हुआ है। इसके बारे में दोनों देशों को सोचना होगा और कारगर कदम उठाने होंगे।

इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, माकपा महासचिव प्रकाश करात, समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, सपा महासचिव अमर सिंह, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और जनार्दन द्विवेदी समेत अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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