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    ममता ने सिंगुर पैकेज ठुकराया, मांग पर अड़ीं (लीड-1)

    By Staff
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    कोलकाता, 16 सितम्बर (आईएएनएस)। नैनो परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मसले पर अपने रुख पर अड़ीं तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पुनर्वास पैकेज की पेशकश ठुकरा दिया है।

    सिंगुर में मंगलवार को टाटा मोटर्स के निर्माणाधीन नैनो संयंत्र के सामने जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, "सरकार (पश्चिम बंगाल सरकार) ने कृषि जमीं जिबन जीबिका रक्षा कमेटी (तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाला किसान संगठन) के साथ राज भवन में सात सितंबर को एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था।"

    उन्होंने कहा, "उस बैठक में निर्णय लिया गया था कि जमीन विवाद सुलझाने के लिए चार सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया जाएगा। लेकिन इस समझौते के पांच दिन के अंदर ही सरकार ने उस समिति को भंग कर दिया।"

    ममता ने कहा कि उन्होंने बैठक में हिस्सा लिया, क्योंकि इसके लिए राज्यपाल ने खुद पहल किया था। अन्यथा उन्हें मर्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर भरोसा नहीं था।

    उन्होंने कहा कि बैठक में सरकार ने किसानों को ज्यादातर जमीन नैनो परियोजना क्षेत्र के अंदर से लौटाने का वादा किया था। बाद में वे समझौते में किए गए अपने वादे से मुकर गए।

    ममता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस अपनी जमीन खो चुके किसानों के लिए राज्य सरकार की ओर से घोषित नए पैकेज की पेशकश का समर्थन नहीं करती। उन्होंने कहा, "पिछले सप्ताह राज्य सरकार ने हमसे सलाह लिए बगैर सिंगुर के किसानों के लिए पैकेज की घोषणा की थी। हम जमीन के बदले जमीन चाहते हैं।"

    समझौते की एक प्रति पढ़ते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नैनो परियोजना क्षेत्र के अंदर की केवल 70 एकड़ जमीन देने के लिए तैयार है। हमारे लोगों ने पहले ही परियोजना क्षेत्र के अंदर की लगभग 300 एकड़ जमीन और इसके बाहर ठीक बगल में 100 एकड़ जमीन की पहचान की है। लेकिन सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है।

    गौरतलब है कि कोलकाता से लगभग 40 किलोमीटर दूर सिंगुर में नैनो परियोजना के लिए सरकार ने कुल 997.11 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। लेकिन तृणमूल कांग्रेस और किसानों के संगठन कृषि जमीं जिबिका रक्षा कमेटी (केजेजेआरसी) का कहना है कि इसमें से 400 एकड़ जमीन किसानों से उनकी मर्जी के खिलाफ ली गई है, लिहाजा यह जमीन उन्हें लौटा दी जानी चाहिए।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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