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लीमन ब्रदर्स दिवालिया होने के कगार पर

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लीमन ब्रदर्स के पतन का असर दुनियाभर के शेयर बाज़ारों पर पड़ सकता है
अमरीका का निवेश बैंक लीमन ब्रदर्स दिवालिया होने के कगार पर है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर दुनिया भर के शेयर बाज़ारों पर पड़ेगा. जानकार कहते हैं कि अरबों डॉलर गवां चुके लीमन ब्रदर्स का अगर पतन हुआ तो उसका असर दुनिया भर के शेयर बाज़ारों पर पड़ेगा

दरअसल, अमरीकी वित्त बाज़ार 1930 की आर्थिक मंदी के बाद से अब तक के सबसे बड़े बैंकिंग संकट का सामना कर रहा है. लीमन ब्रदर्स बैंक से व्यापार करने वाली दुनिया भर की वित्तीय संस्थाएँ अरबों डॉलर का नुक़सान उठाने के कगार पर हैं.

स्थिति के बुरे होने का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि रविवार होने के बावजूद वॉल स्ट्रीट में आपात स्थिति के तौर पर व्यापार हुआ ताकि लीमन ब्रदर्स में पैसा लगाने वालों को कम से कम नुक़सान हो.

दरअसल कई निवेशकों ने लीमन ब्रदर्स के शेयर किसी आगे की तारीख़ को ख़रीदने या बेचने का अगर फ़ैसला किया होगा. अब ऐसी स्थिति में अगर कंपनी दिवालिया होने की घोषणा कर देती है तो उसके शेयर बाज़ार से हट जाएँगे और इन हालात में उन निवेशकों को नुक़सान होता.

इसलिए रविवार को वॉल स्ट्रीट में हुए उस कारोबार से उन लोगों को मौक़ा मिला कि वे ख़ुद को बचाने के लिए क़दम उठा लें.

सौदे से हाथ खींचे

बैंक ऑफ़ अमरीका और ब्रितानी बैंक बारक्लेज़ को लीमन ब्रदर्स का संभावित ख़रीदार माना जा रहा था मगर दोनों ने ही सौदे से हाथ खींच लिया. अमरीकी वित्त विभाग ने कुछ अन्य बैंकों से भी चर्चा की मगर लीमन ब्रदर्स बैंक के कंगाल होने की आशंका काफ़ी बढ़ गई है.

दरअसल अमरीकी वित्त विभाग किसी को भी ये गारंटी देने के लिए तैयार नहीं था कि ख़रीदार को लीमन के कुछ हिस्सों से अगर घाटा होता है तो वो उसकी भरपाई कर देगा.

अब अगर संकेतों की मानें तो सोमवार जब व्यापार होगा तो बाज़ार औंधे मुँह गिर सकता है.बताया जा रहा है कि डाओ जोन्स सूचकांक के 300 अंकों तक गिरने की आशंका है. चिंता ये व्यक्त की जा रही है कि अमरीका की अन्य वित्तीय कंपनियाँ भी ख़तरे में हैं.

इंश्योरेंस कंपनी एआईजी, घरों के लिए ऋण उपलब्ध कराने वाली कंपनी वॉशिंगटन म्यूचुअल और निवेश बैंक मेरिल लिंच सबके शेयरों की क़ीमत पिछले हफ़्ते एक तिहाई तक गिर गई है.

अगर इनके बचाव में कुछ नहीं हुआ तो वित्त बाज़ार में भरोसा और गिर सकता है. अब अमरीका के और बैंक 50 अरब डॉलर जुटा रहे हैं जिससे संकट में आने वाली वित्तीय कंपनियों को बचाने की कोशिश होगी. यानी एक बड़े संकट की आहट अब साफ़ सुनाई देने लगी है.

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