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मध्यप्रदेश में कुपोषण का कहर,

By Staff
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भोपाल, 15 सितंबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में कुपोषण का तांडव जारी है। अब तक 124 बच्चों की जानें जा चुकी हैं। पिछले दो माह से चल रहा मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खंडवा, सतना, शिवपुरी और श्योपुर में कुपोषण काल बन कर कहर ढा रहा है।

भोपाल, 15 सितंबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में कुपोषण का तांडव जारी है। अब तक 124 बच्चों की जानें जा चुकी हैं। पिछले दो माह से चल रहा मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खंडवा, सतना, शिवपुरी और श्योपुर में कुपोषण काल बन कर कहर ढा रहा है।

प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य महकमे के तमाम दावे झूठे साबित हो रहे हैं।

सबसे बुरा हाल सतना जिले के उचेहरा और मझगवां विकास खंडों का है। इन क्षेत्रों में पिछले दो माह में कुल 64 बच्चों की कुपोषण से मौत हुई है। उचेहरा विकास खंड में मरने वाले बच्चों की संख्या 16 है। इसमें हरदुआ में 8, नकझीर में 2, चौतरिहा में 5 और पहाड़ी में 1 बच्चे की मौत हुई है।

इसी तरह मझगवां विकास खंड में कुल 48 बच्चों ने कुपोषण के कारण दम तोड़ा है। इसमें उडन टोला में 3, कानपुर में 4, भट्टन टोला में 2, मैडुलई में 3, राम नगर खुखला में 2, पटनीखुर्द में 2, देवलहा में 2 और सफी टोला में 2 बच्चों की मौत शामिल है। इसके अलावा 28 गांवों में एक-एक बच्चे की मौत हुई है।

सतना जिले के कलेक्टर विजय आनंद कुरील बच्चों की मौत को तो स्वीकारते हैं, लेकिन वह साफ कहते हैं कि सारी मौतें कुपोषण के कारण नहीं हुई हैं। उनके अनुसार कई बच्चे डायरिया, पेट की बीमारी, वायरल बुखार आदि बीमारियों के कारण काल के गाल में समाए हैं। वे इस मामले में चिकित्सकों की रिपोर्ट का हवाला देते हैं।

भोजन के अधिकार अभियान व मध्यप्रदेश लोक संघर्ष साझा मंच द्वारा किए गए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि इन इलाकों में बच्चों को ठीक से पोषाहार नहीं मिल पा रहा है।

साझा मंच के प्रशांत दुबे का कहना है इन इलाकों के सर्वेक्षण में यह बात खुलकर सामने आई है कि मरने वालों में 90 प्रतिशत बच्चे आदिवासियों के हैं।

खंडवा जिले के खालवा विकास खंड का हाल और भी बुरा है। यहां पिछले डेढ़ माह के भीतर 15 गांवों में 39 बच्चों ने दम तोड़ा है। स्पंदन समाज सेवा समिति के सीमा प्रकाश बताते हैं कि इस विकास खंड में आदिवासी बहुसंख्यक हैं और लगभग हर गांव में दो बच्चों ने कुपोषण के कारण दम तोड़ा है।

प्रकाश ने हाल ही में ऐसे 15 गांवों का सर्वेक्षण किया था। सर्वेक्षण के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, उसके अनुसार करवानी में 6, भोजवाड़ी में 2, दगड़ कोट में 2, भागपुर में 1, कुकरपुरा में 1, मुहालखाड़ी में 5, कारबेडी में 1, अम्बाडा में 3, जमुनापुर में 2, चिनाईपुर में 3, झिलपा में 2, सालीठाना में 4, संदरदेव, लंगोटी, चट्टू बट्टू, झिझिरी में 1 - 1 बच्चों की मौत हुई है।

खंडवा के कलेक्टर एस़ बी़ सिंह भी कुपोषण को बच्चों की मौतों का कारण नहीं मानते। उनके अनुसार इन मौतों के पीछे बीमारियों का हाथ है। उनके अनुसार स्वास्थ्य कर्मियों का दल गांव-गांव जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रहा है और उन्हें उचित परामर्श दे रहा है। पोषाहार का भी इंतजाम किया गया है।

ग्वालियर और चम्बल अंचल में भी बुरी स्थिति है। भोजन के अधिकार अभियान व मध्यप्रदेश लोक संघर्ष साझा मंच की रिपोर्ट के मुताबिक शिवपुरी जिले के महलसराय गांव में ही अकेले 13 बच्चों की मौत हुई है।

शिवपुरी जिले के कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव तो स्वयंसेवी संगठनों पर ही सवाल खड़े करते हैं। उनके अनुसार इन संगठनों ने कितने लोगों को जीवनदान दिया, इसका आंकड़ा वे कभी प्रस्तुत नहीं करते।

भोजन के अधिकार अभियान की रिपोर्ट बताती है कि श्योपुर में 8 बच्चों की मौत हुई है।

प्रदेश में कुपोषण से हो रही बच्चों की मौत और पोषाहार वितरण में गड़बड़ी की वजहें जानने के लिए जब महिला एवं बाल विकास मंत्री कुसुम महदेले से संपर्क किया गया तो उन्होंने बात करने से ही इंकार कर दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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