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'परमाणु समझौते से संप्रभुता पर आँच'

By रेणु अगाल
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तीन दिनों तक चलेगी राष्ट्रीय कार्यकारिणी
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत और अमरीका के बीच परमाणु समझौते से देश की संप्रभुता को ख़तरा पैदा हो सकता है.

कर्नाटक की राजधानी बंगलौर में शुक्रवार को भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तीन दिनों की बैठक शुरू हुई.

बैठक का उदघाटन करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, "अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने कांग्रेस में जो कुछ कहा उससे ये बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि यूपीए सरकार ने देश से सच को छुपाया है."

उन्होंने आरोप लगाया कि परमाणु करार पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों को भी गुमराह किया है.

राजनाथ सिंह का कहना था कि इस परमाणु करार के बाद भारत का परमाणु परीक्षण करने का अधिकार छिन गया है.

परमाणु परीक्षण का अधिकार

राजनाथ सिंह ने परीक्षण का अधिकार छिनने को बेहद गंभीर मसला बताते हुए कहा कि अगर पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन परमाणु परीक्षण करते हैं तो ऐसी हालत में भारत के पास परीक्षण का अधिकार नहीं रह जाना बेहद ख़तरे की बात हो सकती है.

उन्होंनें दलील दी कि हाल में चीन के अख़बार पीपुल्स डेली में छपी ख़बर में कहा गया था कि चीन अपनी परमाणु शक्ति का विस्तार करने का इच्छुक है और इसके लिए वह और परमाणु परीक्षण कर सकता है.

परमाणु करार पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों को भी गुमराह किया है. इस परमाणु करार के बाद भारत का परमाणु परीक्षण करने का अधिकार छिन गया है.
उन्होंनें कहा कि भाजपा का विरोध वामदलों के अमरीका विरोध से बिल्कुल अलग है, क्योंकि भाजपा हमेशा अमरीका के साथ अच्छे रिश्ते रखने में विश्वास रखती है लेकिन ये तभी तक है जब तक कि देश की संप्रभुता पर कोई आँच नहीं आए.

राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की अगुआई वाली केंद्र की यूपीए की सरकार एक अल्पमत की सरकार है और अल्पमत की सरकार को परमाणु करार जैसे बड़े समझौते करने का कोई नैतिक आधार ही नहीं है.

उन्होंनें कहा कि अमरीका ने भारत को बिना रोक-टोक परमाणु ईधन उपलब्ध कराने का जो आश्वासन दिया है उसका कोई क़ानूनी आधार नहीं है, बल्कि ये सिर्फ़ एक राजनीतिक आश्वासन है.

उन्होंनें कहा कि सरकारें और उसके मुखिया तो बदल जाते हैं लेकिन पुख़्ता समझौतों से ही देशों के संबंध स्थायी रहते हैं.

अन्य मुद्दे

विवादित रामसेतु के मुद्दे को उन्होंनें एक धार्मिक आस्था का मामला बताते हुए कहा कि रामसेतु भारत की पहचान है. उन्होंनें घोषणा की कि अगर केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनती है तो रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर दिया जाएगा.

अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन के मुद्दे पर चले विवाद पर राजनाथ सिंह ने सरकार से अमरनाथ यात्रा के मार्ग का राष्ट्रीयकरण करने की मांग की ताकि इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ न उठाया जा सके.

छह राज्यों के विधानसभा चुनावों और संभावित लोकसभा चुनावों के पहले हो रही इस आख़िरी कार्यकारिणी का महत्व राजनीतिक रुप से बढ़ गया है.

कर्नाटक में पहली बार सरकार बनाकर दक्षिण भारत में क़दम रखने वाली पार्टी के लिए इस अहम बैठक के लिए बंगलौर के चयन का भी बहुत सांकेतिक महत्व है.

और शायद इसीलिए भाजपा के झंडे और भगवा रंग की धूम बंगलौर में नज़र आ रही है. ऐसा लगता है कि दक्षिण भारत में अपनी इस पहुँच को ज़ोर-शोर से पेश करना चाहती है.

नवंबर में छह राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और मिज़ोरम में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और झारखंड की राजनीतिक स्थिति अस्थिर बनी हुई है.

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