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    भाजपा उठाएगी महँगाई और तुष्टिकरण के मुद्दे

    By रेणु अगाल
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    भाजपा ने यूपीए सरकार पर चरमपंथ के ख़िलाफ़ सरकार के रुख़ को नरम बताया है
    भारतीय जनता पार्टी अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कहा है कि वह महँगाई, कृषि नीति, आतंकवाद और तुष्टिकरण के मुद्दे जनता तक ले जाएगी.

    बंगलौर में चल रही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तीन दिनों की बैठक में शनिवार को इन मुद्दों पर विचार विमर्श करते हुए राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया गया है.

    भाजपा नेतृत्व ने राजनीतिक प्रस्ताव पारित करते हुए यूपीए सरकार पर 'आतंकवाद' की समस्या से निपट पाने में पूरी तरह से नाकाम रहने की बात कही है.

    पार्टी ने कहा है कि अब आम लोगों के बीच यूपीए सरकार की 'ग़लत नीतियों और भेदभाव के रवैए का सच' सामने लाया जाएगा.

    पार्टी ने महँगाई, मुद्रास्फीति के साथ ही देश की कृषि नीति को यूपीए की 'ग़लतियों और नाकामियों' के तौर पर सामने लाने का फ़ैसला किया है.

    साथ ही यह भी घोषणा की गई है कि आतंकवाद और चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सरकार ने नरम रवैया अपनाया है जिससे ऐसे संगठनों का हौसला बढ़ा है जो चरमपंथी गतिविधियों में लिप्त हैं.

    'किसकी हितैषी है सरकार..'

    केंद्र सरकार के सुरक्षा सलाहकार भी इस क़ानून की पैरवी कर चुके हैं फिर भी गृह मंत्रालय इस क़ानून को यह कहते हुए पारित नहीं होने दे रहा है कि यह पोटा जैसा क़ानून है
    राजनीतिक प्रस्ताव के बाद पत्रकारों के साथ बात करते हुए सबसे तीख़े और गरम तेवर में नज़र आए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी.

    मोदी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि गुजरात की राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित आतंकवाद निरोधक क़ानून के रास्ते में केंद्र सरकार ने जानबूझकर अड़ंगा लगा रखा है.

    उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार के सुरक्षा सलाहकार भी इस क़ानून की पैरवी कर चुके हैं, फिर भी गृह मंत्रालय इस क़ानून को यह कहते हुए पारित नहीं होने दे रहा है कि यह पोटा जैसा क़ानून है."

    उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र को घेरते हुए कड़े शब्दों में कहा, "जो लोग आतंकवाद की समस्या के बारे में सोचते हैं, वे इस क़ानून के पक्ष में हैं और जो लोग आतंकवादियों के बारे में सोचते हैं वे लोग इस क़ानून का विरोध कर रहे हैं."

    पार्टी ने संटूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (सिमी) और अफ़ज़ल गुरू जैसे कई मुद्दों के उदाहरण देते हुए केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उनके चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कमज़ोर रवैए के चलते ही पिछले चार वर्षों में भारत आतंकवादी घटनाओं का केंद्र बन गया है.

    हालांकि ऐसे तमाम मुद्दों पर केंद्र को घेर रही भारतीय जनता पार्टी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमरीका के साथ परमाणु क़रार के मुद्दे को किस तरह और कितना लोगों के बीच उठाया जाएगा.

    भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी

    वैसे पार्टी की ओर से जिन मुद्दों पर केंद्र को घेरने की बात कही गई उनमें कई बातें पुरानी ही थीं और पार्टी ने आतंकवाद, अमरनाथ, कश्मीर, अल्पसंख्यक तुष्टिकरण जैसे कई मुद्दों पर अपने पुराने बयान को ही दोहराया.

    चुनावी तैयारी

    पार्टी के लिए छह राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों और संभावित लोकसभा चुनावों के पहले हो रही इस आख़िरी कार्यकारिणी का महत्व राजनीतिक रुप से ख़ासा है.

    इसीलिए इस बैठक में पार्टी का मुख्य रूप से ध्यान उन बातों पर है जिनसे राज्य और केंद्र में सत्ता का सफ़र आसान हो सके.

    पार्टी ने स्पष्ट किया कि आगामी चुनाव में असम गण परिषद और भारतीय जनता पार्टी मिलकर चुनाव लड़ने वाले हैं.

    यह भी बताया गया कि पार्टी की नीति के आधार पर ही दिल्ली सहित अन्य राज्यों के नेतृत्व की घोषणा के साथ ही चुनाव लड़ा जाएगा. हालांकि दिल्ली में पार्टी का नेतृत्व कौन करेगा, इस पर कोई नाम न सुझाते हुए कहा गया कि संसदीय समिति इस बारे में निर्णय लेगी.

    पार्टी कार्यकारिणी की बैठक के दौरान उत्तरप्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों में तालमेल की संभावनाओं, नफ़ा-नुकसान पर चिंतन जैसे काम भी कर रही है ताकि आम चुनावों को लेकर एक ठोस रणनीति बनाई जा सके.

    पार्टी ने राजनीतिक प्रस्ताव पारित करने के साथ ही देश के कई राज्यों में क़रीब 150 विजय संकल्प रैलियों के आयोजन की घोषणा भी की है.

    इस क्रम की शुरुआत शनिवार को पार्टी की बंगलौर में एक रैली से हो रही है जिसके बाद अन्य राज्यों में पार्टी की रैलियों का आयोजन किया जाएगा.

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