आरुषि हत्याकांड: सीबीआई फेल आरोपियों को बेल

सीबीआई द्वारा हथियार डाल दिये जाने और मामले की जांच पर कई सवाल खड़े हो गये हैं। सबसे बड़ा सवाल अभी भी बरकरार है कि आखिर आरुषि और हेमराज का असली हत्यारा कौन है। अब वो पकड़ा भी जाएगा या नहीं इस पर भी कई सवाल खड़े हो गये हैं।
इस केस में सबूतों को इकठ्ठा करने में सीबीआई के फेल होने के बाद सभी आरोपियों को जमानत मिल गई है। इस मामले में आरोपी कंपाउंडर कृष्णा और राजकुमार को न्यायालय ने जमानत शुक्रवार को जमानत दे दी।
सीबीआई ने नौ सितंबर को कहा था कि उसके पास मामले के तीनों आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं और वह हत्या में प्रयुक्त हथियार को बरामद करने में विफल रही है।
कृष्णा की जमानत अर्जी सीबीआई की विशेष मजिस्ट्रेट सपना मिश्रा के समक्ष, जबकि राजकुमार की जमानत याचिका सीबीआई की विशेष न्यायाधीश रमा जैन के समक्ष पेश की गई थी।
सीबीआई के वकील सुरेश बत्रा ने कृष्णा की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि वह विदेशी नागरिक है और अपने देश नेपाल भाग सकता है। कृष्णा को 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर जमानत दी गई। बचाव पक्ष के वकील एफसी शर्मा ने कहा कि सीबीआई कृष्णा के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि चार महीने तक कृष्णा को हिरासत में रखने के बावजूद सीबीआई हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद नहीं कर सकी है।
सीबीआई वकील ने अदालत में कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक राजकुमार को भी न्यायिक हिरासत में रखने की आवश्यकता है। वह भी नेपाली नागरिक है। यद्यपि, रमा जैन की अदालत ने बचाव पक्ष के वकील नरेश यादव के तर्को को स्वीकार करते हुए राजकुमार को 25-25 हजार के दो मुचलकों पर जमानत दे दी।
इससे पहले मामले के तीसरे आरोपी विजय मंडल को रमा जैन की अदालत ने पहले ही जमानत पर रिहा कर दिया था।


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