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'परमाणु सहयोग के प्रारंभिक कदम शुरु'

By Staff
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भारत के पास परमाणु ऊर्जा बनाने के लिए यूरेनियम सीमित मात्रा में ही मौजूद है
भारत-अमरीका परमाणु समझौते के आख़िरी चरण में पहुँचते ही भारत ने इस क्षेत्र में सक्रिय देशों से व्यापार और सहयोग के कदम उठाने शुरु कर दिए हैं.

ग़ौरतलब है कि हाल में इस समझौते को परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह की मंज़ूरी मिली है. इसके बाद अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते के दस्तावेज़ अमरीकी संसद यानि कांग्रेस के पास अंतिम मंज़ूरी के लिए भेज दिए हैं.

भारत-अमरीका परमाणु समझौते के तहत तीस साल से परमाणु ईंधन, तकनीक और संयंत्रों के आयात-निर्यात के मामले में अलग-थलग पड़ा भारत, परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह से इस संदर्भ में व्यापार कर पाएगा.

परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) के उस बयान के बाद जिसके तहत भारत एनएसजी देशों के साथ असैनिक परमाणु सहयोग कर सकता है, सरकार ने इस क्षेत्र में सक्रिय विदेश सहयोगियों के साथ व्यापारिक सहयोग के कदम उࢠाने शुरु कर दिए हैं
संभावना जताई गई है कि अमरीकी संसद भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर ज़रूरी कार्रवाई करने के बाद सितंबर तक इसे लौटा देगी. उल्लेखनीय है कि बुश प्रशासन को अमरीकी सांसदों को 26 सितंबर को सत्रावसान से पहले इस समझौते को पारित करने के लिए राज़ी करना होगा.

जॉर्जिया विश्वविद्यालय में एशिया कार्यक्रम के निदेशक अनुपम श्रीवास्तव का मानना है कि इस बात की पूरी संभावना है कि इसी सत्र में इसे पारित कर दिया जाए क्योंकि रिपब्लिकन पूरी तरह से इसके साथ हैं और डेमोक्रेट भी भारत के साथ इस समझौते को तोड़ना नहीं चाहेंगे.

'प्राथमिक बातचीत शुरु'

भारत के विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है - "परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) के उस बयान के बाद जिसके तहत भारत एनएसजी देशों के साथ असैनिक परमाणु सहयोग कर सकता है, सरकार ने इस क्षेत्र में सक्रिय विदेश सहयोगियों के साथ व्यापारिक सहयोग के कदम उठाने शुरु कर दिए हैं."

भारत सरकार फ़्रांस, रूस और अन्य मित्र देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों को अंतिम स्वरूप देने के बारे में भी कदम उࢠा रही है. असल सहयोग 123 समझौते जेसे अन्य द्विपक्षीय समझौतों के बाद ही शुरु होगा. लेकिन भारत के परमाणु ऊर्जा निगम ने अमरीकी कंपनियों से प्राथमिक बातचीत शुरु कर दी है
समाचार एजेंसियों के अनुसार, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने कहा है कि भारत ने अमरीका को वहाँ से आधुनिक तकनीक और सुविधाएँ आयात करने की मंशा के बारे में बता दिया है.

नवतेज सरना का कहना था, "भारत सरकार फ़्रांस, रूस और अन्य मित्र देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों को अंतिम स्वरूप देने के बारे में भी कदम उठा रही है. असल सहयोग 123 समझौते जेसे अन्य द्विपक्षीय समझौतों के बाद ही शुरु होगा. लेकिन भारत के परमाणु ऊर्जा निगम ने अमरीकी कंपनियों से प्राथमिक बातचीत शुरु कर दी है."

महत्वपूर्ण है कि भारत फ़्रांस और रूस के साथ इस संदर्भ में बातचीत पूरी कर चुका है लेकिन परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) की मंज़ूरी न होने की वजह से इन देशों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए थे.

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