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बिहार बाढ़ : राहत कार्यो में तेजी लाने के लिए केंद्रीय कानून में संशोधन हो : शरद

By Staff
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नई दिल्ली, 11 सितम्बर (आईएएनएस)। जनता दल-युनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत व पुनर्वास कार्यो में तेजी लाने के लिए एक केंद्रीय कानून में संशोधन की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा कानून से राहत व पुनर्वास कार्यो के निष्पादन में न सिर्फ बाधा पहुंच रही है बल्कि कई लोग मुआवजे से वंचित भी हो रहे हैं।

बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का 11 दिनों तक दौरा करने के बाद राजधानी लौटे यादव ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए है कि राहत व पुनर्वास संबंधी जो मौजूदा केंद्रीय कानून है, उसके तहत बाढ़ में मारे गए किसी व्यक्ति के परिवार को तभी राहत मिल सकती है जब तक कि मृतक के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट न आ जाए। जबकि बाढ़ से प्रभावित ऐसे लाखों लोग हैं, जिनके परिवार में मौत भले ही किसी की न हुई हो पर दूसरा नुकसान भारी पैमाने पर हुआ है लेकिन उनके पास कुछ सबूत नहीं है। ऐसे तमाम लोगों को भी राहत व पुनर्वास की आवश्यकता है।

यादव ने कहा कि ऐसे में सत्यापन व सरकारी दस्तावेजों के माध्यम से लोगों को राहत व पुनर्वास कार्य में शामिल किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार यदि संबंधित कानून में संशोधन करती है तो इससे राहत व पुनर्वास के कार्यो में तेजी आएगी।

बिहार में बाढ़ से जो हालात बने हुए है उसे सुनामी और कैटरीना से भी भयावह बताते हुए यादव ने कहा, "वैसे तो बिहार सरकार इससे निपटने के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही है, लेकिन बाढ़ की मार इतनी भयावह है कि उसे उच्च स्तरीय सहयोग की आवश्यकता है।"

केंद्रीय रेल मंत्री लालूप्रसाद यादव और इस्पात मंत्री रामविलास पासवान द्वारा बाढ़ को लेकर की जा रही राजनीतिक बयानबाजी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, "नेताओं की इस प्रकार की टीका-टिप्पणी से जनता में भेदभाव की भावना घर कर जाती है और साथ ही राहत व पुनर्वास के कार्यो में बाधा पहुंचती है। मैं इन नेताओं से अपील करता हूं कि वे आरोप-प्रत्यारोप ने करें और राजनीतिक बयानबाजी से बचें। उन्हें कुछ कहना ही है तो मामले की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग के समक्ष अपनी बातें कहें।"

यादव ने कहा कि बिहार को और भी सहायता की जरूरत है। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए केंद्र सरकार से अधिक से अधिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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