• search

नैनो प्रोजेक्ट पर अभी भी संशय

|
रतन टाटा का कहना है कि वे अपने कर्मचारियों को ख़तरे में नहीं डाल सकते
पश्चिम बंगाल के सिंगुर में टाटा की नैनो कार के कारखाने को लेकर समझौते के बाद भी संशय बना हुआ है कि कार निर्माण शुरु होगा या नहीं. टाटा के इस कारखाने के ख़िलाफ़ कई दिनों के विरोध प्रदर्शनों के बाद राज्यपाल के हस्तक्षेप से एक समझौता हुआ था लेकिन टाटा ने कहा है कि इस समझौते में 'बातें साफ़ नहीं' हैं.

नैनो के कारखाने का तृणमूल कांग्रेस और कुछ स्वयंसेवी संगठन यह कहते हुए विरोध कर रहे हैं कि इससे किसानों की ज़मीन छिन रही है जबकि सरकार चाहती है कि टाटा सिंगुर में निर्माण कार्य शुरू करे.

टाटा ने जब से समझौते में बातें स्पष्ट नहीं होने की बात कही है उसके बाद से समझौता करने वाले दोनों पक्ष यानी तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अलग अलग बयान आ रहे हैं.

रविवार की रात हुए समझौते के बाद अब चार सदस्यीय समिति की मंगलवार को बैठक हो रही है और इसमें दोनों ही पक्ष अलग अलग बात कह रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी का कहना है कि सरकार ने सिंगुर क्षेत्र में ही किसानों के लिए "अधिकतम संभव ज़मीन' उपलब्ध करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है ताकि उन किसानों का पुर्नवास हो सके जो इस इलाके से जाना नहीं चाहते और जिन्होंने अपनी अधिगृहित की जा चुकी ज़मीन के लिए मुआवज़ा नहीं लिया है".

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मेरी समझ में सरकार नैनो परियोजना क्षेत्र में ही 300 एकड़ ज़मीन खोजेगी और पास के इलाक़े में बाकी 100 एकड़ ताकि किसानों का पुनर्वास हो".

उधर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी पर 'भ्रम फै़लाने' का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने 1000 एकड़ के फै़क्ट्री एरिया में मात्र 100 एकड़ 'अधिकतम संभव ज़मीन' खोजने की प्रतिबद्धता जताई है. बाकी ज़मीन प्रोजेक्ट एरिया से बाहर खोजी जाएगी.

अपने कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, "टाटा परियोजना नहीं बदलेगी. मुख्य फै़क्ट्री और उससे जुड़े उद्योग 935 एकड़ में लगेंगे, बाकी ज़मीन किसानों को दी जाएगी लेकिन बाकी की बची ज़मीन प्रोजेक्ट एरिया से बाहर खोजनी होगी".

उद्योग मंत्री निरुपम सेन ने कहा, "ममता बनर्जी ने ज़मीन आधारित पुनर्वास की बात कही थी और हमने इसकी कोशिश की है. यह ज़रुरी नहीं कि ज़मीन कहां मिलती है फ़ैक्ट्री एरिया में या बाहर. अगर वहां खेती हो सकती है तो ठीक है और किसान बहुत दूर न हों इस ज़मीन से. ममता ने भी कहा है कि वो नहीं चाहती कि टाटा की परियोजना सिंगुर छोड़कर जाए".

उधर टाटा अपने रुख पर क़ायम है और वो चाहते हैं कि स्थिति बिल्कुल स्पष्ट हो जिसकी फिलहाल संभावना नहीं दिख रही है.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more