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देर-सवेर अमेरिकी कांग्रेस से भी मंजूरी मिल ही जाएगी परमाणु करार को

By Staff
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वाशिंगटन , 9 सितम्बर (आईएएनएस)। भारत- अमेरिका परमाणु समझौते को अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी के लिए पेश किया जाने वाला है। बुश प्रशासन को इसके लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं लेकिन अब सवाल बस यह है कि इसे शीघ्र मंजूरी मिलती है या देर से।

वाशिंगटन , 9 सितम्बर (आईएएनएस)। भारत- अमेरिका परमाणु समझौते को अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी के लिए पेश किया जाने वाला है। बुश प्रशासन को इसके लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं लेकिन अब सवाल बस यह है कि इसे शीघ्र मंजूरी मिलती है या देर से।

यह कहना मुश्किल है कि अधिकारी सोमवार से शुरू होने वाले कांग्रेस के सत्र के लिए कितनी जल्दी 'हाइड पैकेज' तैयार कर लेते हैं।

अमेरिकी आणविक ऊर्जा कानून और हाइड एक्ट के अनुसार समझौते पर चर्चा के लिए कांग्रेस को 30 दिन का समय दिया जाना अनिवार्य है। इसके बाद कांग्रेस इस पर 60 दिनों के भीतर मतदान कर सकती है।

बुश प्रशासन की मंशा 30 दिन के नियम से छूट पाने की है और इसके लिए वह कांग्रेस सदस्यों का समर्थन जुटाने के लिए कठिन प्रयास कर रहा है।

कांग्रेस को हाइड पैकेज भेजने के पहले उसमें राष्ट्रपति द्वारा प्रमाणित सभी पूर्व आवश्यक दस्तावेजों का होना अनिवार्य है। इसमें 45 सदस्यीय परमाणु आपूर्ति समूह (एनएसजी) देशों से भारत को मिली छूट और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ विशेष निगरानी समझौता भी शामिल है।

इस हफ्ते में किसी समय कांग्रेस के समक्ष हाइड पैकेज के पेश किए जाने के बाद उस पर मतदान से पहले इसे प्रतिनिधि सभा और सीनेट की विदेश संबंध समितियों द्वारा पास किया जाना आवश्यक है।

इस प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण कांग्रेस सदस्यों और दोनों समितियों के अध्यक्षों का समर्थन होना आवश्यक है।

सीनेट की विदेश समिति के डेमोक्रेट अध्यक्ष जोसेफ बिडेन जो उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं, पहले से ही समझौते के पक्ष में हैं। परंतु प्रतिनिधि सभा की समिति के डेमोक्रेट अध्यक्ष हावर्ड एल.बरमैन ने कहा है कि जब तक वे संतुष्ट नहीं हो जाते कि एनएसजी की छूट हाइड एक्ट के अनुरूप ही है तब तक वे इस मामले में जल्दबाजी नहीं करेंगे।

बरमैन का कहना है कि वे भारत के साथ परमाणु ऊर्जा के सहयोग का समर्थन करते हैं लेकिन उन्होंने जोर दिया कि केवल नए कानून के पास होने के बाद ही कांग्रेस में 30 दिनों की आवश्यक अवधि को किनारे रखा जा सकता है।

इस प्रकार का कानून 123 समझौते में संशोधन के नए दरवाजे खोल सकता है। इससे 123 समझौते के विरोधियों को नया मसाला मिल सकता है। बुश प्रशासन ऐसी स्थिति में आकर समझौते को खतरे में डालना नहीं चाहेगा और अधिक विरोध की स्थिति में वह कुछ समय इंतजार कर सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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