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रमजान के दौरान राहत शिविरों में मुस्लिमों की मदद कर रहे हैं हिंदू

By Staff
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पटना, 7 सितम्बर (आईएएनएस)। बाढ़ पीड़ित बिहार के राहत शिविरों में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखी जा सकती है जहां हिंदू, रोजा रख रहे अपने मुस्लिम साथियों की मदद कर रहे हैं।

पटना, 7 सितम्बर (आईएएनएस)। बाढ़ पीड़ित बिहार के राहत शिविरों में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखी जा सकती है जहां हिंदू, रोजा रख रहे अपने मुस्लिम साथियों की मदद कर रहे हैं।

बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री नीतीश मिश्र ने कहा, "राहत शिविरों में हिंदू अपने संसाधन उपलब्ध कराकर रमजान के दौरान रोजा रख रहे मुस्लिम साथियों की मदद कर रहे हैं।"

ऐसी रिपोर्टे भी आई हैं जिनमें कहा गया है कि सरकारी राहत शिविरों के बाहर स्वयंसेवी संगठन रोजा रख रहे मुस्लिमों को खाने के पैकेट बांट रहे हैं।

सहरसा जिले में कार्य कर रहे एक सामाजिक कार्यकर्ता रंजीव ने कहा, "हिंदू आबादी रोजा रखने वाले मुस्लिमों के लिए फल, मिठाई और खाने का इंतजाम कर रही है।"

पुर्णिया जिले के एक राहत शिविर में रह रही अररिया निवासी शकीला बानो ने बताया, "कोसी की बाढ़ में सब कुछ बह जाने के बाद हम राहत शिविर में रोजे रख रहे हैं। यही मौका है जब हम अल्लाह के प्रति अपनी आस्था प्रकट कर सकते हैं।"

मुरलीगंज निवासी हालिम अहमद ने कहा कि उनका दृढ़ विश्वास है कि कठिन समय में रोजे जरूर रखने चाहिए हालांकि बाढ़ के दौरान इसके लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुख सचिव आर.के. सिंह ने बताया कि सरकार रोजा रख रहे मुस्लिमों के लिए पर्याप्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।

अनुमानों के अनुसार बाढ़ से तकरीबन 7-8 लाख मुस्लिम आबादी बुरी तरह प्रभावित हुई है। उल्लेखनीय है कि बाढ़ प्रभावित अररिया और पुर्णिया जिलों की 40 फीसदी आबादी मुस्लिम है जबकि मधेपुरा, सुपौल और सहरसा में मुस्लिम आबादी करीब 15 से 20 फीसदी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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