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बुश और मनमोहन ख़ुश, भाजपा नाराज़

By Staff
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जुलाई 2005 में मनमोहन-बुश बातचीत के बाद इस असैनिक परमाणु समझौते की प्रक्रिया शुरु हुई
भारत-अमरीका परमाणु समझौते को परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह की मंज़ूरी पर भारत-अमरीका सरकारें ख़ुश हैं. लेकिन भाजपा बहुत नाराज़ है.

समझौते को मंज़ूरी मिलने के बाद भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने फ़ोन पर बात की और मनमोहन सिंह ने बुश का धन्यवाद किया.

महत्वपूर्ण है कि ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और न्यूज़ीलैंड को इस समझौते को मंजूरी दिए जाने पर आपत्ति थी. लेकिन ऑस्ट्रिया का कहना था कि उसने अपनी आपत्ति तब वापस ली जब भारत ने शुक्रवार को संकल्प लिया कि वह 'न तो कोई नई परमाणु दौड़ शुरु करेगा और न ही परमाणु तकनीक के बारे में कोई संवेदनशील जानकारी अन्य देशों से बाँटेगा.'

अमरीका के हथियार नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के कार्यवाहक उपमंत्री जॉन रॉड ने कहा, "ये परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के लिए, भारत के लिए और भारत-अमरीका संबंधों के लिए ऐतिहासिक क्षण है."

ये परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के लिए, भारत के लिए और भारत-अमरीका संबंधों के लिए ऐतिहासिक क्षण है. यही नहीं ये भारत के बाकी दुनिया के साथ संबंधों के संदर्भ में भी ऐतिहासिक समय है. ये परमाणु अप्रसार प्रणाली को मज़बूत बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण समय है

उनका कहना था, "यही नहीं ये भारत के बाकी दुनिया के साथ संबंधों के संदर्भ में भी ऐतिहासिक समय है. ये परमाणु अप्रसार प्रणाली को मज़बूत बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण समय है."

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बयान में कहा - "...हम इस फ़ैसले का स्वागत करते हैं....ये भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम है...ये दशकों से भारत के परमाणु मुख्यधारा से अलग-थलग होने को ख़त्म करता है...मैं अमरीका और परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के अन्य सदस्यों की इस बारे में भूमिका के लिए उनका शुक्रिया अदा करता हूँ."

तकनीक और परमाणु ईंधन की आपूर्ति की गारंटी के बिना परमाणु परीक्षण के अधिकार को त्याग देना, इस समझौते को बेमानी बना देता है. यदि भारत परीक्षण करता है तो परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह की शर्तों के तहत उसे ईंधन की सप्लाई बंद हो जाएगी और करोड़ों रुपयों का निवेश व्यर्थ जाएगा

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा है, "तकनीक और परमाणु ईंधन की आपूर्ति की गारंटी के बिना परमाणु परीक्षण के अधिकार को त्याग देना, इस समझौते को बेमानी बना देता है. यदि भारत परीक्षण करता है तो परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह की शर्तों के तहत उसे ईंधन की सप्लाई बंद हो जाएगी और करोड़ों रुपयों का निवेश व्यर्थ जाएगा."

उधर सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी का कहना था, "इससे असैनिक मकसदों के लिए परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और अन्य देशों के बीच सहयोग का नया दौर शुरु होगा...ये हमारी उम्मीदों के मुताबिक है और सरकार की नीति, और निशस्त्रीकरण और अप्रसार पर राष्ट्रीय आम राय के अनुरूप है."

वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, "ये भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है. विश्व ने भारत की विश्वसनीयता को स्वीकार किया है."

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