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परमाणु समझौते पर एनएसजी की मुहर

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India-America N-Deal
वियना, 6 सितम्‍बर: लंबी जद्दोजहद और तमाम विरोधों के बाद आखिरकार भारत-अमरीका परमाणु समझौते को 45 देशों के न्‍यूक्लियर सप्‍लायर्स ग्रुप (एनएसजी) ने मंजूरी दे दी। एनएसजी ने शनिवार को भारत की परमाणु समझौते के ड्राफ्ट पर सर्वसम्मति से अपनी मुहर लगा दी।

दो दिनों की इस बैठक में शुक्रवार को हुई चर्चा में भारत को छूट देने के मसले पर कई देशों की सहमति नहीं बन सकी थी, जिस कारण परमाणु समझौता खतरे में पड़ती नज़र आ रहा था, लेकिन शनिवार को विभिन्‍न देशों के सकारात्‍मक रुख से गेंद अंत में भारत के पाले में ही गिरी।

बातचीत शुक्रवार को ही खत्‍म हो जाती, लेकिन देर रात छूट संबंधी प्रस्ताव के मसौदे से चीन ने नकारात्‍मक रुख दिखाया और वह आस्ट्रिया, स्विटजरलैंड, न्यूजीलैंड और आयरलैंड जैसे देशों के साथ हो लिया।

उक्‍त सभी देश परमाणु मसौदे में परिवर्तन की मांग कर रहे थे। इन सभी देशों की मांग थी कि इसमें उस परिणाम का जिक्र होना चाहिए जो भारत के परमाणु परीक्षण करने की स्थिति में अमल में लाया जाएगा।

यही नहीं परमाणु समझौते में खटाई डालने के लिए बेरमैन ने इस हफ्ते अमरीकी विदेश विभाग के नौ महीने पुराने खत को सार्वजनिक किया था जिसमें कांग्रेस सदस्य टॉम लैन्टोस को आवश्स्त किया गया था कि अगर भारत परमाणु परीक्षण करता है तो यह समझौता खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि इन सबसे ऊपर उठते हुए एनएसजी ने भारत को मंजूरी दे ही दी।

एनएसजी में यह फैसला तीन दिन तक चली कूटनीतिक वार्ता के बाद लिया गया जिसमें अमेरिका की अहम भूमिका रही। परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के इस 45 सदस्यीय समूह का दुनिया भर में परमाणु ईंधन और प्रौद्योगिकी पर नियंत्रण है।

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