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उत्तरप्रदेश में कांग्रेस को 1 दर्जन से अधिक सीट नहीं देना चाहती सपा (लीड-1)

By Staff
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नई दिल्ली, 5 सितम्बर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के महासचिव अमर सिंह ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी उत्तरप्रदेश में कांग्रेस को दर्जन भर से अधिक सीटें देने के मूड में नहीं है। अमर सिंह का कहना है कि उत्तरप्रदेश में कांग्रेस-सपा का गठबंधन बनें या न बनें लेकिन उसका केंद्र सरकार पर कोई प्रतिकूल असर नहीं होगा। उनका मानना है कि दोनों दलों को ऐसे जिताऊ व टिकाऊ उम्मीदवारों का चयन करना चाहिए जो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का डटकर मुकाबला कर सके।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित 'प्रेस से मिलिए' कार्यक्रम में शिरकत करते हुए सिंह ने देश के मौजूदा राजनीतिक हालातों के साथ-साथ नई राजनीतिक सहयोगी बनी कांग्रेस के साथ अपने रिश्तों की गर्माहट पर भी खुलकर अपने विचार व्यक्त किए।

उत्तरप्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस से चल रही वार्ता के बारे में सिंह ने बताया कि यदि 2004 के फार्मूले पर कांग्रेस टिकट बंटवारा चाहती है तो 12 सीटों पर उसका हक बनता है और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुखिया लालू यादव द्वारा पिछले लोकसभा चुनावों में बिहार में दिए गए टिकटों के फार्मूले पर वह यदि बंटवारा चाहती है तो फिर उसे आठ सीटों से ही संतोष करना पड़ेगा। क्योंकि जिन लालू यादव को कांग्रेस महासचिव व उत्तरप्रदेश प्रभारी दिग्विजय सिंह गठबंधन धर्म का बहुत बड़ा पालनकर्ता बता रहे हैं, उन्होंने बिहार में कांग्रेस को महज चार सीटें ही दी थी। इसके आधार पर कांग्रेस को हम उत्तरप्रदेश में आठ सीटें देने को तैयार हैं।

अमर सिंह ने कहा कि इसके बावजूद यदि कांग्रेस का कोई अपना फार्मूला है तो हम उसे भी स्वीकार करने को तैयार हैं, लेकिन यह तभी स्वीकार होगा जब कांग्रेस अन्य राज्यों मसलन मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जहां हमारा वोट बैंक है, वहां भी उसी फार्मूले के आधार पर वह हमारे लिए सीटें छोड़ें।

सिंह ने साफ-साफ कहा कि जहां तक सीटों के तालमेल का सवाल है सपा अपनी जीती हुई कोई भी सीट नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि रामपुर, फरूखाबाद, पडरौना जैसी सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने कहा कि यदि हम इलाहाबाद की सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दें तो फिर समाजवादी पार्टी चलाने का कोई मतलब ही नहीं रहेगा। फिर तो सपा का कांग्रेस में विलय कर देना ही बेहतर होगा। सिंह ने कहा कि रायबरेली और अमेठी की सीट पर सपा अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी भले ही हमारा गठबंधन हो या न हो।

छह सीटों पर दोस्ताना संघर्ष के दिग्विजय सिंह के फार्मूले को नकारते हुए सिंह ने कहा कि राजनीति में दोस्ताना संघर्ष का कोई स्थान नहीं होता है। दोस्ताना संघर्ष ही करना है तो फिर सूबे की 78 सीटों पर यह होना चाहिए। क्योंकि दो सीटें हमने पहले ही सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए छोड़ने का ऐलान कर दिया है। सिंह ने केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के लिए दौरहरा सीट छोड़ने की बात जरूर कही। जितिन शाहजहांपुर से लोकसभा के लिए चुने गए थे। उनकी यह सीट आरक्षित हो गई है।

परमाणु करार के मुद्दे पर वाशिगटन पोस्ट के ताजा खुलासे के बारे में सिंह ने कहा, "डा. मनमोहन सिंह इस देश के प्रधानमंत्री हैं। हमें उनकी बातों पर यकीन करना चाहिए न कि अमेरिका के ताजा खुलासे पर। पार्टी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उन बातों को ही सत्य मानती है जो उन्होंने संसद में अपने भाषण में कही थीं।" उन्होंने कहा कि संसद में परमाणु करार पर चली बहस के दौरान कई मौकों पर प्रधानमंत्री ने कहा है कि वे देश की संप्रभुता और अखंडता से कोई समझौता नहीं करेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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