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    बीएमडब्ल्यू कांड : संजीव नंदा को पांच वर्ष की सजा (लीड-2)

    By Staff
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    नई दिल्ली, 5 सितम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने व्यापारी संजीव नंदा को अपनी बीएमडब्ल्यू कार से कुचलकर छह लोगों को मारने के जुर्म में पांच वर्षो के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला नौ वर्षो तक चली लंबी सुनवाई के बाद आया है।

    नई दिल्ली, 5 सितम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने व्यापारी संजीव नंदा को अपनी बीएमडब्ल्यू कार से कुचलकर छह लोगों को मारने के जुर्म में पांच वर्षो के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला नौ वर्षो तक चली लंबी सुनवाई के बाद आया है।

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार ने इससे पूर्व बुधवार को पूर्व नौसेना प्रमुख एस.एम.नंदा के पोते और हथियार व्यापारी सुरेश नंदा के बेटे संजीव को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (2) के तहत गैरइरादतन हत्या का दोषी करार दिया था। इसके तहत अधितकतम 10 वर्ष की सजा हो सकती थी।

    नंदा ने 10 जनवरी 1999 को दक्षिणी दिल्ली के लोधी इलाके में छह लोगों को अपनी कार से कुचल कर मार डाला था। न्यायाधीश ने मुंबई के एलिएस्टर एंथनी परेरिया मामले से इस मामले की तुलना करते हुए कहा, "अगर इस मामले की उससे तुलना की जाए तो यह ज्यादा गंभीर अपराध है। परेरिया के रक्त में 0.112 प्रतिशत अल्कोहल था जबकि नंदा के खून में अल्कोहल की मात्रा 0.115 प्रतिशत थी।"

    एक साल पहले बंबई उच्च न्यायालय ने फुटपाथ पर सात लोगों को कुचल कर मार डालने के इल्जाम में परेरिया को तीन वर्षो की कैद और पांच लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

    न्यायाधीश ने कहा, "परेरिया के मामले में लोग फुटपाथ पर सोए हुए थे लेकिन इस मामले में खड़े थे, इसका मतलब अभियुक्त उन्हें देख सकता था। परेरिया की कार मौके पर ही रुक गई थी जबकि नंदा ने घटनास्थल पर ही अपनी कार का मुआयना किया और फिर उसे लेकर वहां से भाग गया।"

    सजा लिखते समय नंदा की उम्र को ध्यान में रखने की बचाव पक्ष की दलील पर न्यायालय ने कहा कि चूंकि वह पश्चिमी सभ्यता से परिचित था और उसने अमेरिका से ड्राइविंग लाइसेंस हासिल किया था अत: उसे शराब पीकर गाड़ी चलाते समय विशेष रूप से सतर्क होना चाहिए था।्र

    न्यायालय ने कहा कि घटना के तुरंत बाद मृतकों के परिजनों को अच्छा-खासा मुआवजा देने की बात नंदा के पक्ष में जाती है लेकिन समाज के प्रति जिम्मेदारी के मुद्दे का उसे बख्शा नहीं जा सकता।

    अदालत ने मामले के अन्य अरोपी व्यापारी राजीव गुप्ता को सबूत नष्ट करने का दोषी करार देते हुए एक वर्ष कैद के साथ 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। गुप्ता के दो घरेलू नौकरों भोला नाथ और श्याम सिंह को भी सबूत नष्ट करने का दोषी करार देते हुए छह-छह महीने की कैद और एक-एक सौ रुपये का जुर्माना लगाया गया। फैसला सुनाए जाने के तत्काल बाद इन तीनों को दस-दस हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत पर रिहा कर दिया गया।

    नंदा इससे पूर्व नौ महीना जेल में बिता चुके हैं, जिसे उनकी पांच वर्ष की सजा में कम कर दिया जाएगा।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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