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    जम नहीं रहा है 'दिल्ली पुस्तक मेले' का रंग

    By Staff
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    संदीप कुमार पांडेय

    संदीप कुमार पांडेय

    नई दिल्ली, 5 सितम्बर (आईएएनएस)। राजधानी के प्रगति मैदान में लगे 14 वें 'दिल्ली पुस्तक मेले' में पहले जैसा रंग नजर नहीं आ रहा है। 'महिला लेखन' की थीम पर आयोजित मेले में कुछ नई पुस्तकें और पेपरबैक संस्करण आने के बावजूद प्रकाशकों को जहां पाठकों का इंतजार है, वहीं साहित्य जगत के लोगों का कहना है कि भरपूर बिक्री के बावजूद प्रकाशक अपने निहित स्वार्थो के चलते पाठकों के 'अभाव' का रोना रोते रहते हैं।

    पुस्तक मेले में आने वाले लोगों में युवाओं की संख्या ही ज्यादा है और वे करियर संबंधी किताबों की खरीद कर रहे हैं। प्रभात प्रकाशन समूह के संचालक पीयूष ने बताया कि उनके प्रकाशन संस्थान ने मेले में विशेष रूप से चेतन भगत की दो बेस्टसेलर किताबों 'फाइव प्वांइट समवन' और 'वन नाइट एट कालसेंटर' के हिंदी पेपरबैक संस्करण लांच करने की योजना बना रखी है, जिन्हें शनिवार को मेले में बिक्री के लिए रखा जाएगा।

    इस बार मेले में आर.के.नारायण के सुप्रसिद्ध उपन्यास अंग्रेजी उपन्यास 'गाइड' को पहली बार हिंदी पेपरबैक में उतारा गया है। राजपाल एंड संस के प्रणव जौहरी ने बताया कि यह पुस्तक विशेष रूप से मेले में लाई गई है और आगामी एक-दो महीने तक इसके बाजार में आने की संभावना नहीं है। नारायण के इस अंग्रेजी उपन्यास पर सन 1965 में इसी नाम से देवानंद और वहीदा रहमान अभिनीत फिल्म बनी थी जिसे सात फिल्मफेयर पुरस्कर मिले थे।

    भारतीय ज्ञानपीठ ने इस बार मेले में युवा महिला लेखिकाओं की पुस्तकें प्रस्तुत की हैं, इनमें सुधा अरोड़ा, पंखुरी सिन्हा, मनीषा कुलश्रेष्ठ आदि शामिल हैं। समूह के विपणन अधिकारी दिनेश भटनागर ने बताया कि ऐसा मेले की थीम 'महिला लेखन' को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

    लगभग सभी प्रकाशकों की शिकायत है कि अच्छी तरह प्रचार-प्रसार न हो पाने के कारण इस बार थोक खरीदार अधिक संख्या में नहीं आए जिससे उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। मेले में आए अधिसंख्य लोगों की शिकायत यही रही कि पेपरबैक संस्करणों की कम संख्या और किताबों की ऊंची कीमत उन्हें मन मसोसने पर मजबूर कर रही है।

    पुस्तकों की बिक्री ज्यादा न होने संबंधी प्रकाशकों की शिकायत से असहमति जताते हुए नया ज्ञानोदय के संपादक तथा वरिष्ठ साहित्यकार रवींद्र कालिया कहते हैं कि हिंदी साहित्य में पाठकों और खरीदारों की संख्या निरंतर बढ़ रही है लेकिन प्रकाशक लेखकों को रायल्टी देने के डर से बाजार में पाठकों का कृत्रिम अभाव दिखाते हैं।

    इस सालाना मेले का आयोजन फेडरेशन आफ इंडियन पब्लिशर्स (एफआईपी) और इंडियन ट्रेड प्रमोशन आर्गनाइजेशन (आईटीपीओ) मिलकर करते हैं। एफआईपी के अध्यक्ष आर.सी. गोविल ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कम प्रचार प्रसार की बात स्वीकार करते हुए कहा कि यह आईटीपीओ की जिम्मेदारी है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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