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बाढ़ राहत कार्य तेज़ पर पर्याप्त नहीं

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अब भी हज़ारों लोग बाढ़ में फँसे हुए हैं
कोसी नदी की भयावह बाढ़ के 16वें दिन राहत और बचाव कार्य में तेज़ी तो दिख रही है लेकिन उसे कहीं से भी पर्याप्त नहीं माना जा सकता.

अधिकारियों का कहना है कि सेना की 20 कंपनियाँ, 11 हेलिकॉप्टरों और 1300 नौकाओं के माध्यम से बाढ़ प्रभावितों को बचाने और राहत शिविरों तक पहुँचाने के अभियान में जुटी हुई हैं.

लेकिन सरकारी दावे से अलग प्रभावित इलाक़ों से ख़बरें आ रही हैं कि लाखों बाढ़ पीड़ित अब भी राहत का इंतज़ार कर रहे हैं और राहत कार्य में व्यवस्था की बेहद कमी है.

इस बीच बिहार में बाढ़ राहत के कार्य में जुटी संस्थाओं में से एक -- ऐक्शन एड -- का कहना है कि बाढ़ में मारे गए लोगों की संख्या 2000 के आस-पास हो सकती है, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ मरने वालों की संख्या अब भी 100 से कम है.

पंद्रह दिनों से एक ही कपड़ा पहनकर बिलख रहे लोग अपने रिश्तेदारों की मौत का मातम मना रहे हैं लेकिन उनकी मौत किसी सरकारी आंकड़े में दर्ज नहीं है.

देर से ही सही, सेना के तीनों अंगों के जवान और ग़ैर-सरकारी संगठनों के कार्यकर्ता तेज़ी से राहत और बचाव के काम में जुटे दिखाई दे रहे हैं.

कोसी अंचल के 25 लाख लोगों के लिए यह विपदा इतनी भारी है कि किसी तरह की राहत पर्याप्त नहीं हो सकती फिर भी 16वें दिन कुछ तेज़ी ज़रूर दिखाई दे रही है.

सेना के हेलिकॉप्टर राहत पहुँचाने में लगे हैं

मधेपुरा के मठाही रेलवे स्टेशन पर पनाह लिए हुए हज़ारों लोगों में से कई ने बाढ़ में अपने प्रियजन के मारे जाने या उनसे बिछड़ जाने की करुण कहानी सुनाई.

स्टेशन पर सैकड़ों बच्चे भूख से बिलख रहे हैं और लोग शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा है.

जहाँ तहाँ पानी में बहती लाशें दिख रही हैं, ज्यादातर जानवरों की लाशें फूलकर उतरा रही हैं और अक्सर किसी इंसान की लाश भी दिख जाती है.

राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि 15 लाख से अधिक मवेशी इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और उनके खाने के लिए चारे की कोई व्यवस्था अब तक नहीं की जा सकी है, यानी जानवर पिछले 16 दिन से भूखे हैं.

फँसे लोग

प्रशासन का कहना है कि सुपौल ज़िले के छापातुर, त्रिवेणीगंज, प्रतापगंज और वीरपुर में, मधेपुरा ज़िले के कुमारखंड, चौसा, आलमनगर और ग्वालपाड़ा, सहरसा के सौर बाज़ार और सोनवर्षा और अररिया ज़िले के कई स्थानों पर अभी भी भारी संख्या में लोग फँसे हुए हैं.

अब राहत और बचाव कार्य के केंद्र में ये इलाक़े रहेंगे जिससे कि वहाँ फँसे हुए लोगों को जितनी जल्दी हो सके वहाँ से निकाला जा सके.

जिन लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है उन सभी लोगों को शरण देना और राहत सामग्री उपलब्ध कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है.

क़रीब 12 लाख लोग बेघर हो गए हैं. राहत शिविरों में रहने की जगह नहीं और अपर्याप्त राहत सामग्री को लेकर कई इलाक़ों में तनाव भी है.

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