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पोटा बहाली और सिमी पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की भाजपा ने (लीड-1)

By Staff
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नई दिल्ली, 3 सितम्बर (आईएएनएस)। आतंकवाद के मुद्दे पर केंद्र की सुयंक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को घेरने के मकसद से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो वरिष्ठ नेताओं लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को एक मंच से स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया (सिमी) के खिलाफ श्वेत पत्र जारी करने, पोटा कानून बहाल करने और संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी पर लटकाने की मांग की।

पार्टी मुख्यालय में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा, "सिमी ने देश में अपनी जड़ें जमा ली हैं। हम सरकार से मांग करते हैं कि वह सिमी के खिलाफ एक श्वेत पत्र जारी करे।"

उन्होंने कहा, "मैं मानता हूं कि सरकार के पास इतनी सामग्री है कि दुनिया के समक्ष सिमी की सच्चाई सामने आ सकेगी और यह स्पष्ट हो जाएगा कि सिमी के मंसूबे कितने खतरनाक हैं। "

आडवाणी ने कहा कि संप्रग सरकार ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद को प्रोत्साहन दिया है। आतंकवाद के प्रति उसका रुख एकदम नरम है। संप्रग के घटक दलों ने हाल के दिनों में जिस प्रकार का बयान दिया है, उससे आतंकवादियों के हौसले बुलंद हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वीकार कर लेना चाहिए कि वह सिमी की गतिविधियों पर लगाम कसने में नाकाम रही है।

आडवाणी ने कहा कि आतंकवाद आज एक गंभीर चुनौती बन गई है। ऐसे में इससे निपटने के लिए पोटा बहाल करना या फिर पोटा जैसा नया कानून बनाया जाना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों ने संगठित अपराध के खिलाफ कानून बनाने के प्रस्ताव केंद्र को भेजे हैं लेकिन अभी तक केंद्र सरकार ने इसे हरी झंडी नहीं दी है।

उल्लेखनीय है कि 'महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम' (मकोका) की तर्ज पर गुजरात में 'गुजरात संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम' (गुजकोक) बनाने का प्रस्ताव केंद्र के पास पिछले चार सालों से लंबित है।

उन्होंने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी पर चढ़ाने की मांग एक बार फिर दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से आज तक इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है कि आखिरकार अफजल को अब तक फांसी क्यों नहीं दी गई।

उन्होंने कहा कि अफजल की फांसी के संबंध में केंद्र सरकार अविलंब उच्चतम न्यायालय के आदेशों का पालन करे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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