• search
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

    बिहार बाढ़ : जलस्तर में कमी के बावजूद तबाही जारी (लीड-1)

    By Staff
    |

    मेधा पाटकर ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने बताया कि हजारों लोग अब भी बाढ़ में फंसे हुए हैं। उन्हें बाढ़ से निकालकर बाहर लाना चाहिए। पाटकर ने कहा कि किरासन तेल के अभाव में बाढ़ पीड़ित अंधेरे में रहने को विवश हैं। कपड़े के अभाव में महिलाएं स्नान नहीं कर पा रही हैं।

    इस बीच कोसी के जलस्तर में कमी हो रही है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक बुधवार को दोपहर में कोसी का बहाव बैराज क्षेत्र में एक लाख 11 हजार क्यूसेक था।

    इधर, बाढ़ प्रभावित जिले सुपौल में बाढ़ का पानी दो फीट घटा है, जबकि छातापुर व त्रिवेणीगंज की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। अररिया में सुरसर के पास कोसी के जलस्तर में कमी आने के बावजूद नरपतगंज, भरगामा, रानीगंज और फारबिसगंज में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

    सहरसा में जीवनरेखा बनी सड़क महेशखूंट-सहरसा पथ पर कोसी के बढ़ते दबाव के कारण खतरा उत्पन्न हो गया है। हालांकि इस पथ पर सरकार द्वारा मरम्मत और बचाव कार्य करवाए जा रहे हैं। यहां बाढ़ से प्रभावित पांचों प्रखंडों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

    पूर्णिया में भी बाढ़ के पानी के घटने की सूचना है। यहां बाढ़ के पानी में एक से डेढ़ फीट की कमी हुई है। उधर, मधेपुरा के शहरी इलाकों में एक फीट पानी में कमी बताई जा रही है।

    इस बीच, मधेपुरा-पूर्णिया, मधेपुरा-वीरपुर, और मधेपुरा- उदाकिशनगंज पथ के पानी के तेज बहाव में कट जाने व सड़क के ऊपर अब भी कई स्थानों पर पानी बहने के कारण इन सड़कों पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

    उधर, राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव आऱ क़े सिंह ने बुधवार को बताया कि बाढ़ प्रभावित मधेपुरा, सुपौल, अररिया, पूर्णिया समेत अन्य जिलों के दूर-दराज इलाकों से प्रशासन द्वारा छह लाख, 18 हजार 891 बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। उन्होंने संभावना व्यक्त की कि ग्रामीण इलाकों में बाढ़ से घिरे शेष लोगों को भी दो से तीन दिनों के भीतर निकाल लिया जाएगा।

    उन्होंने बताया कि कोसी प्रमंडल में संचालित 246 राहत शिविरों में लगभग ढाई लाख लोगों को रखा गया है। प्रधान सचिव सिंह ने बताया कि बाढ़ग्रस्त इलाकों में सेना की 20 टुकड़ी अपने 11 हेलीकॉप्टर तथा नौसेना की तीन टुकड़ी अपने 150 मोटरबोट, 1391 नौकाएं और राष्ट्रीय आपदा सुदृढ़ीकरण बल (एनडीआरएफ) के 635 जवान लगातार राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं।

    उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा कोसी नदी से प्रभावित पांच जिलों में 101 चिकित्सा शिविर तथा 63 पशु शिविर भी खोल दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि खोले गए इन राहत शिविरों में वर्तमान समय में दो लाख, 48 हजार, 285 विस्थापितों को रखा गया है। इन शिविरों में शुद्ध पेयजलापूर्ति के लिए 415 चापाकल लगाए गए हैं।

    इस बीच, राज्य के सूचना विभाग के सचिव राजेश भूषण ने बताया कि राहत शिविरों में बाढ़ पीड़ितों को रहने, खाने एवं उनके स्वास्थ्य की देखभाल की पुख्ता व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि इन शिविरों में बाढ़ पीड़ितों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हो इसके लिए शिविरों की निगरानी के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के सचिव शशि शेखर शर्मा, स्वास्थ्य विभाग के सचिव दीपक कुमार एवं खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव त्रिपुरारी शरण को बुधवार से इन शिविरों की निगरानी का जिम्मा सरकार द्वारा दी गई है।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    For Daily Alerts

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more