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ईसाइयों ने ली शरणार्थी शिविरों में शरण

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हज़ारों ईसाइयों ने शरणार्थी शिविरों में शरण ली हुई है.
अधिकारियों का कहना है कि उड़ीसा में हुई हिंसा के बाद 10 हज़ार से भी ज़्यादा ईसाई शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं. मरनेवालों की संख्या अब 20 हो गई है.
उनका कहना है कि इस बीच यहाँ जारी हिंसा में मरने वालों की संख्या 20 हो गई है. यह हिंसा दस दिन पहले एक हिंदू नेता के मारे जाने से शुरू हुई थी.

क्षेत्र में क़रीब तीन हज़ार पुलिसकर्मी तैनात हैं लेकिन इसके बावजूद चर्च और ईसाइयों पर हमले जारी हैं. एक वरिष्ठ माओवादी नेता ने इस हत्या की ज़िम्मेदारी ली लेकिन हिंदू संगठन इसके लिए ईसाइयों पर आरोप लगा रहे हैं.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस हिंसा को राष्ट्रीय कलंक कहा है. पोप ने भी इस हिंसा की निंदा की है और इटली की सरकार ने इस पर चिंता ज़ाहिर की है.

बदतर हालात

अधिकारियों ने बताया कि राज्य के नए इलाक़ों में भी हिंसा शुरू होने के साथ ही शरणार्थी शिविरों में आने शुरू हो गए. एक माओवादी नेता ने स्वामी की हत्या की ज़िम्मेदारी ली है. समाचार एजेंसी रॉयटर ने कंधमाल के एक राहत शिविर के प्रभारी बिजॉय सारंगी के हवाले से कहा, "लोग दरअसल बहुत ही बुरी हालत में हैं."

उन्होंने कहा, " वे पड़ोस के गाँवों से आए हैं और स्थानीय प्रशासन उन्हें यहाँ लाने के लिए हरसंभव मदद कर रहा है. अब धीरे-धीरे यहाँ लोगों की संख्या बढ़ रही है."
राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक कंधमाल ज़िले के हिंसाग्रस्त इलाकों में हिंसा के शिकार कुछ लोगों से मिले.

नवीन पटनायक ने कहा, "मैंने यहाँ कुछ घरों को देखा, लोगों से भी मिला हूँ. उन्हें राहत सामग्री दी गई है. लोगों का कितना नुक़सान हुआ है, इस बारे में गहन जाँच की जाएगी और उन्हें मुआवज़ा भी दिया जाएगा."

स्कूल कॉलेज बंद

इस बीच राज्य के कोरापुट ज़िले में भी ईसाई विरोधी ताज़ा हिंसा होने की भी ख़बर मिली है. अधिकारियों के अनुसार हमलावरों ने दस चर्चों को जला दिया और ईसाइयों के घरों और संस्थानों पर हमले किए जा रहे हैं.

उन्होंने बताया कि अगले तीन दिनों तक कोरापुट के सभी स्कूलों-कॉलेजों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं. उड़ीसा में ईसाइयों और हिंदू समुदाय के बीच हिंसा बढ़ती जा रही है

यह समस्या 10 दिन पहले शुरू हुई जब स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की कंधमाल ज़िले में चार अन्य लोगों के साथ गोली मार कर हत्या कर दी गई. हिंदू भीड़ ने इसका आरोप ईसाइयों पर लगाया और गिरिजाघर, मठ और अनाथालय जला दिए.

मारे गए लोगों में बरखामा गाँव की एक हिंदू महिला थी जो एक अनाथालय में काम करती थी. इस बीच, एक प्रमुख माओवादी नेता ने दावा किया कि स्वामी लक्ष्मणानंद की हत्या माओवादियों ने की है.

शनिवार को प्रमुख विद्रोही नेता आज़ाद होने का दावा करते हुए एक व्यक्ति ने एक स्थानीय अख़बार से कहा कि हिंदू नेता को उनके फ़ासीवादी कार्यों के लिए सज़ा दी गई है.

उन्होंने कहा, "स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को पीएलजीए(पीपुल ऑफ़ लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) ने पिछले साल दिसंबर में ईसाइयों के विरोध में हिंसा भड़काने में भूमिका होने की वजह से मारा."

भुवनेश्वर से बीबीसी के राहुल टंडन ने कहा कि यह बहुत कठिन मामला है, हिंदू संगठन आरोप लगा रहे हैं कि ईसाई पादरी जनजातियों और गरीब तबके के लोगों को पैसा देकर धर्म परिवर्तन कराते हैं.

जबकि ईसाइयों का कहना है कि निचली जाति के हिंदू ख़ुद अपनी इच्छा से धर्म बदलते हैं. संवाददाता का कहना है कि राज्य में जहाँ प्रशासन इस विकट परिस्थिति को सुलझाने के लिए जूझ रहा है वहीं इन दोनों धर्मों के बीच दिनोंदिन कटुता बढ़ती जा रही है.

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