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प्रचंड ने किया मंत्रिमंडल का विस्तार, तीन उप प्रधानमंत्री बनाए (लीड-1)

By Staff
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काठमांडू, 31 अगस्त (आईएएनएस)। नेपाल का प्रधानमंत्री पद संभालने के तेरह दिनों के बाद आखिरकार माओवादी नेता पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। प्रचंड ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपने मंत्रिमंडल में एक या दो नहीं बल्कि तीन-तीन उप प्रधानमंत्रियों की नियुक्ति की। उप प्रधानमंत्री बनने वालों में माओवादी, यूएमएल और मधेसी जनाधिकार फोरम (एमजेएफ) के सदस्य शामिल हैं।

काठमांडू, 31 अगस्त (आईएएनएस)। नेपाल का प्रधानमंत्री पद संभालने के तेरह दिनों के बाद आखिरकार माओवादी नेता पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। प्रचंड ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपने मंत्रिमंडल में एक या दो नहीं बल्कि तीन-तीन उप प्रधानमंत्रियों की नियुक्ति की। उप प्रधानमंत्री बनने वालों में माओवादी, यूएमएल और मधेसी जनाधिकार फोरम (एमजेएफ) के सदस्य शामिल हैं।

प्रचंड ने अपने मंत्रिमंडल में 15 नए मंत्रियों को शामिल किया। हालांकि शपथ ग्रहण समारोह का पत्रकारों ने बहिष्कार किया और सुरक्षा के मद्देनजर इस दौरान राजधानी काठमांडू में कर्फ्यू लगा दिया गया था। प्रचंड ने 18 अगस्त को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।

प्रधानमंत्री पद का शपथ ग्रहण करते ही प्रचंड को दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी, नेपाली कम्यूनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्‍सवादी लेनिनवादी (यूएमएल) की चुनौती का सामना करना पड़ा।

यूएमएल ने वरिष्ठता के आधार पर माओवादी सरकार से रार ठानते हुए विपक्ष में बैठने की धमकी दी थी। यूएमएल की मांग थी कि उसके किसी सदस्य को उप प्रधानमंत्री बनाया जाए।

विवाद की संभावनाओं को विराम देते हुए प्रचंड ने रविवार को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए एक या दो नहीं बल्कि तीन-तीन उप प्रधानमंत्रियों की नियुक्ति की।

उप प्रधानमंत्री बनने वालों में माओवादी, यूएमएल और मधेसी जनाधिकार फोरम (एमजेएफ) के सदस्य शामिल हैं।

मंत्रिमंडल का विस्तार शुक्रवार को ही होना था, लेकिन अपनी पार्टी के सदस्यों के बीच उठते विवाद के चलते प्रचंड ने इसे रविवार तक के लिए टाल दिया था।

इससे पहले घोषणा की गई थी कि प्रधानमंत्री शुक्रवार को अपने प्रमुख सहयोगी 'कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल- यूनीफाइड मार्क्‍सिस्ट लेनिनिस्ट' (यूएमएल) के छह और अपने दल के पांच और सदस्यों को मंत्रिमंडल में शामिल करेंगे।

प्रचंड को प्रधानमंत्री बनने में मदद करने वाली यूएमएल ने शासन में हिस्सेदारी को लेकर हुए विवाद के बाद सरकार में शामिल होने से इंकार कर दिया था। पार्टी उप प्रधानमंत्री पद की मांग कर रही थी। प्रचंड के शपथ ग्रहण समारोह में भी यूएमएल ने भाग नहीं लिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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