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सोरेन ने विश्वासमत हासिल किया

By सलमान रावी
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पिछली बार शिबू सोरेन सिर्फ़ दस दिन के लिए मुख्यमंत्री बने थे
झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख शिबू सोरेन ने शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया है.

शिबू सोरेन के पक्ष में 42 मत पड़े जबकि विरोध में 36 और इस तरह उन्हें स्पष्ट विश्वास मत हासिल हो गया.

शुक्रवार को दिन भर चली बहस के बाद शाम को विश्वास प्रस्ताव पर मतविभाजन हुआ जिसमें सोरेन के पक्ष में बहुमत साबित हो गया.

वैसे बुधवार को शपथ ग्रहण से पहले ही यह स्पष्ट हो गया था कि सोरेन विश्वास मत आसानी से हासिल कर लेंगे.

उन्होंने सरकार बनाने का दावा करते समय 42 विधायकों के समर्थन की सूची राज्यपाल को सौंपी थी और उन्हें उतने ही विधायकों का समर्थन हासिल भी हो गया है.

हंगामा

हालांकि शुक्रवार को विश्वास मत से पहले विधानसभा की कार्यवाही गर्माहट वाले माहौल में शुरू हुई और विपक्ष ने विश्वास मत का विरोध किया.

मधु कोड़ा उसी को मिठाई खिलाते दिखे जिसके लिए कुर्सी छोड़नी पड़ी

विधानसभा में विपक्ष के विधायकों ने जमकर हंगामा किया. उनकी मांग थी कि पार्टी बदलने वाले 10 विधायकों के ख़िलाफ़ दल-बदल क़ानून के तहत कार्यवाही की जाए.

इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले को संज्ञान में लिया है. इस पर विधायकों से पूछताछ की जाएगी.

सोरेन को पद और गोपनीयता की शपथ झारखंड के राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी ने बुधवार को ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में दिलवाई थी.

बुधवार को शपथ लेने वालों में पूर्व उपमुख्य मंत्री स्टीफ़न मरांडी के अलावा सभी निर्दलीय विधायक शामिल थे. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कमलेश सिंह, फॉरवर्ड ब्लॉक की अपर्णा सेनगुप्ता और भानु प्रताप साही ने भी मंत्री के रूप में शपथ ली थी.

झारखंड ने पिछले तीन सालों में चार मुख्यमंत्री देखे हैं. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में किसी भी दल या गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया था. इसी वजह से झारखंड में सत्ता की बागडोर निर्दलीय विधायकों के हाथों में चली आई.

राजनीतिक डगर

2005 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्यपाल ने सबसे पहले शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया. मगर निर्दलीय विधायकों ने सोरेन का समर्थन नहीं किया था और वो सदन में अपना बहुमत सिद्ध नहीं कर पाए थे.

सोरेन राज्य के छठे मुख्यमंत्री हैं

उसके बाद अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार निर्दलीय विधायकों के समर्थन से बनी मगर कुछ ही दिनों में निर्दलीय विधायकों ने अर्जुन मुंडा से अपना समर्थन वापस ले लिया.

निर्दलीय विधायक मधु कोडा के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार का गठन हुआ जिसे राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया था.

संसद में मनमोहन सिंह की सरकार को बचाने के एवज़ में शिबू सोरेन को झारखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी यूपीए की तरफ़ से तोहफे के रूप में मिली और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 23 महीने पुरानी कोड़ा सरकार से समर्थन वापस लेते हुए ख़ुद सरकार बनाने का दावा पेश कर कर दिया.

काफ़ी उलटफेर के बाद शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने की सहमति बनी और निर्दलीय विधायकों ने आखिरकार उन्हें समर्थन दे दिया.

मधु कोडा शिबू सोरेन के मंत्रिमंडल से बाहर हैं. उन्हें झारखंड में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की स्टीयरिंग कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया है. इस कुर्सी पर पहले शिबू सोरेन हुआ करते थे.

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