बिहार बाढ़: मौत का तांडव जारी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार मरने वालों की संख्या 12 हो गई है, जबकि गैर सरकारी आंकड़े इससे कहीं अधिक बता रहे हैं। वहीं सरकार का यह भी कहना है कि बाढ़ में 20 लाख लोग फंसे हुए हैं। सेना की मदद से अब तक डेढ़ लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।
कोसी नदी के जलस्तर में लगातार वृद्घि से बीकोठी की ढीबराधनी, भनसारा व लतहारा पंचायतों में तबाही मच गई है। बनमनखी-मुरलीगंज सीमा पर चैनपुर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-107 पानी में डूब चुके हैं।
पूर्णिया जिले के बीकोठी, बनमनखी, रूपौली और धमदाहा प्रखंडों में कोसी ने तबाही मचा रखी है। जगह-जगह शव पानी में बहते नजर आने लगे हैं। जानवर भी मरने लगे हैं, जिस कारण बाढ़प्रभावित इलाकों में संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है।
अररिया के नरपतगंज प्रखंड के कई नए गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। भागलपुर के नवगछिया अनुमंडल में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। सुपौल जिले के वीरपुर, बलुआ, छातापुर, त्रिवेणीगंज के इलाके में पानी का दबाव बढ़ा है।
आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव आर. के. सिंह के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाकों में निजी नाव वाले लोगों को बाहर निकालने की एवज में दो-तीन हजार रुपए ले रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिये गए हैं, साथ ही नावें जब्त करने का काम शुरू हो गया है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में 234 नावें और 50 से अधिक मोटरबोट चल रही हैं तथा 250 नाव और भेज दी गई हैं। सेना की एक-एक टुकड़ी अररिया, सुपौल और मधेपुरा में लगी हुई है और हेलीकाप्टर के जरिए अब तक 23 हजार खाने के पॉकेट गिराए जा चुके हैं।
संक्रामक रोगों से बचाव के लिए सरकार ने जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर भी लगाये हैं। प्रभावित लोगों का काम युद्धस्तर पर जारी है।


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