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धमाकों को लेकर यूपी में राजनीति

By रामदत्त त्रिपाठी
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विस्फोटक सामग्री की बरामदगी केंद्र और मायावती सरकार के बीच मुद्दा बन गई है
उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में धमाके और विस्फोटक सामग्री की बरामदगी केंद्र की कांग्रेस और मायावती सरकार के बीच एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है.

कानपुर धमाकों में दो लोग बजरंग दल के कार्यकर्ता मारे गए थे और कई मुस्लिम संगठनों ने कहा था कि इन लोगों ने जो विस्फोटक सामग्री जमा की थी, वह एक गहरी साजिश का हिस्सा हो सकती है.

केंद्रीय राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को एक पत्र लिख कर कहा था कि इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने के लिए राज्य सरकार एक औपचारिक पत्र भेजे.

जायसवाल ने आशंका व्यक्त की थी कि बजरंग दल कार्यकर्ताओं के इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटकों का जमा करना देश के कई राज्यों में सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश हो सकता है. इसलिए इसकी गहराई से जाँच ज़रुरी है.

पलटवार

लेकिन मायावती ने एक प्रेस कांफ़्रेस कर जायसवाल और केंद्र सरकार पर पलटवार किया.

कानपुर की घटना में बजरंग दल का नाम आते ही यूपीए सरकार ने इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने का अनुरोध कर दिया क्योंकि केंद्र सरकार को पता है कि यदि इस मामले की जाँच उत्तर प्रदेश पुलिस करती है तो सारी सच्चाई खुल कर सामने आ जाएगी

मायावती का कहना था कि उत्तर प्रदेश में इससे पहले भी लखनऊ, फैजाबाद, वाराणसी और गोरखपुर में चरमपंथी हमले हुए थे और रामपुर में केंद्रीय सुरक्षा पुलिस बल कैंप पर हमला हुआ था लेकिन केंद्र सरकार ने कभी भी इन घटनाओं की सीबीआई जाँच नहीं की.

मायावती ने कहा, " कानपुर की घटना में बजरंग दल का नाम आते ही यूपीए सरकार ने इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने का अनुरोध कर दिया क्योंकि केंद्र सरकार को पता है कि यदि इस मामले की जाँच उत्तर प्रदेश पुलिस करती है तो सारी सच्चाई खुल कर सामने आ जाएगी."

मायावती ने आरोप लगाया, "कांग्रेस सरकार ने भाजपा की मदद करने के उद्देश्य से ही सीबीआई जाँच की माँग की."

बहरहाल, मायावती ने प्रस्ताव किया है कि यदि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश में इससे पहले हुए सभी बम धमाकों और चरमपंथी हमलों की जाँच सीबीआई से कराने का निर्णय करे तभी वो कानपुर धमाकों की जाँच सीबीआई से कराने पर अपनी सहमति देगी.

कानपुर में हुए इन बम धमाकों को लेकर विपक्षी पार्टियाँ और कई मुस्लिम संगठन मायावती सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगा रहे हैं.

इन लोगों का आरोप था कि भाजपा समर्थित कट्टरपंथी संगठन लोकसभा चुनाव से पहले सांप्रदायिक तनाव पैदा करना चाहते हैं और उत्तर प्रदेश सरकार उनके प्रति नरम है.

कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल परोक्ष रूप से ये कहना चाहते थे कि मायावती और भाजपा के बीच कहीं न कहीं कोई सांठगाठ है लेकिन मुख्यमंत्री ने उलटे कांग्रेस पर पलटवार कर दिया.

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