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बिहार में पहली बार नहीं टूटा है कोसी का तटबंध

By Staff
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ऐसा नहीं कि कोसी नदी का यह तटबंध पहली बार टूटा है। बताया जाता है कि कोसी नदी के किनारे बने इस तटबंध का निर्माण 1954-55 में किया गया था। सूत्रों के मुताबिक पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटबंधों को मिलाकर अब तक यह नौ बार विभिन्न स्थानों पर टूट चुका है। बताया जाता है कि 1963 में पहली बार यह तटबंध डलवा (नेपाल) के पास टूटा था, इसके बाद 1968 में दरभंगा जिले के जमालपुर के पास एक बार पुन: यह क्षतिग्रस्त हो गया था।

वर्ष 1971 में सुपौल जिले के भटनिया के पास, 1980 में सहरसा के बहुअरवा के पास कोसी का तटबंध टूटा। चार वषों के बाद 1984 में पुन: सहरसा जिले के हिमपुर के पास तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ। वर्ष 1987 में तो यह तटबंध सहरसा जिले में ही दो स्थानों गंडौल व समानी में अलग-अलग समय में टूटा था। वर्ष 1991 में नेपाल के जोगनिया के पास यह तटबंध एकबार फिर टूट गया।

गत 18 अगस्त को नेपाल के कुशहा में एकबार फिर कोसी का यह तटबंध टूटा और इससे लाखों लोग बाढ़ की चपेट में आ गये। बाढ़ विशेषज्ञों का मानना है कि यह तटबंध बनाना ही बड़ी भूल थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर कोसी नदी पर कई किताब लिख चुके समाजसेवी डी़ क़े मिश्रा का मानना है कि तटबंध बनना ही गलत था और अब इस तटबंध के रखरखाव में बरती जाने वाली लापरवाही ने इस तटबंध को और कमजोर कर दिया है।

उन्होंने कोसी के धारा परिवर्तन की बात को उचित नहीं ठहराते हुए कहा कि कोसी का यह तटबंध नौवीं बार टूटा है। तटबंध की मरम्मत करा फिर कोसी को उसी स्थान पर लाया जा सकता है। कोसी नदी पर आधारित 'दोई पाटन के बीच में' नामक पुस्तक के लेखक मिश्रा ने बताया कि सरकार को अगर लोगों को बाढ़ की विभीषिका से बचाना है तो इस तटबंध का उचित रखरखाव करना होगा।

उधर, भारतीय नदी घाटी मंच के अध्यक्ष भगवान पाठक भी कोसी नदी को तटबंध में बांधने को ही गलत मानते हैं। उन्होंने बताया कि कोसी पर बने इस तटबंध के केवल पूर्वी तटबंध की लंबाई 125 किलोमीटर है। हालांकि उन्होंने बताया कि अब कोसी नदी को बांध पाना मुश्किल होगा, क्योंकि प्रत्येक एक सौ वर्ष के बाद कोसी अपना स्थान परिवर्तन करती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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