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गणित में उलझे गुरुजी

By पंकज प्रियदर्शी
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अभी तक सिर्फ़ 10 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने हैं सोरेन
झारखंड में मधु कोड़ा के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख शिबू सोरेन के लिए मुख्यमंत्री बनने की राह आसान नहीं दिखती.

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात के बाद मधु कोड़ा ने त्यागपत्र तो दे दिया है, लेकिन वे शिबू सोरेन के लिए उलझा हुआ अंकगणित छोड़ गए हैं.

झारखंड में बहुमत का आँकड़ा किसी भी गठबंधन के लिए इतना संकीर्ण है कि एक या दो विधायक भी सारा खेल बिगाड़ सकते हैं.

इसी कारण झारखंड में निर्दलीय विधायक सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं वो चाहे भारतीय जनता पार्टी की अगुआई में सरकार बनी हो या फिर यूपीए की.

इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यूपीए के समर्थन से बनी सरकार का अगुआ निर्दलीय मधु कोड़ा थे. मधु कोड़ा के इस्तीफ़ा देने के बाद नई राजनीतिक स्थिति में निर्दलीय विधायकों की भूमिका एक बार फिर अहम होती जा रही है.

बैठकों का सिलसिला

शनिवार देर रात तक झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता कई स्तर पर बैठक करने में लगे हुए थे. शिबू सोरेन बातचीत करने को तैयार नहीं थे क्योंकि उन्हें लगता था कि कहीं सवाल-जवाब के बीच सरकार बनाने की कोशिशों को झटका ना लग जाए.

मधु कोड़ा जी ने बहुत सम्मानजनक तरीक़े से इस्तीफ़ा दिया है. अभी बातचीत चल रही है. यूपीए के सभी घटक दलों से मिलकर बात करके ही फ़ैसला करेंगे

जब मैंने शिबू सोरेन के बेटे और पार्टी महासचिव दुर्गा सोरेन से संपर्क किया तो उनका कहना था कि सब कुछ ठीक चल रहा है और जल्द ही राज्य में सरकार बन जाएगी.

उनका कहना था कि उनकी पार्टी को मधु कोड़ा और बाक़ी निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है. बीबीसी के साथ बातचीत में दुर्गा सोरेन ने कहा, "मधु कोड़ा जी ने बहुत सम्मानजनक तरीक़े से इस्तीफ़ा दिया है. अभी बातचीत चल रही है. यूपीए के सभी घटक दलों से मिलकर बात करके ही फ़ैसला करेंगे."

यह पूछे जाने पर कि अगर यूपीए ने शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने का आश्वासन दिया था, तो मुश्किल क्यों आ रही है, उन्होंने कहा, "दिल्ली में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने के बाद ही यह फ़ैसला हुआ. कोई मुश्किल नहीं है."

लेकिन स्थितियों कुछ और हैं. झामुमो से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी निर्दलीय विधायकों के समर्थन को लेकर चिंतित है और पूरी तरह समर्थन का भरोसा मिलने के बाद ही शिबू सोरेन सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे.

अंकगणित

झारखंड की 82 सदस्यीय विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा के 17 विधायक हैं. कांग्रेस के नौ और राष्ट्रीय जनता दल के सात विधायक हैं.

ये झारखंड का दुर्भाग्य है. जिन्होंने झारखंड के नाम का विरोध किया, उन्हें ही पहली सरकार बनाने का मौक़ा मिल गया तो आगे क्या होगा. हमलोगों ने झारखंड के लिए आंदोलन किया, बलिदान दिया. लेकिन सरकार चलाने का मौक़ा नहीं मिला

एएजेएसयू के दो, फॉरवर्ड ब्लाक के दो, यूएनजीडीपी के दो, जेकेपी और भाकपा माले के एक-एक और पांच निर्दलीय सदस्य हैं. दूसरी ओर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के 29 विधायक हैं. जनता दल-यूनाइटेड के चार विधायक हैं.एक सीट जदयू विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या के कारण रिक्त है.

झारखंड राज्य के गठन के बाद से ही राज्य में हमेशा से ही राजनीतिक अस्थिरता रही है. वर्ष 2000 से 2005 तक भारतीय जनता पार्टी की सरकार रही लेकिन मुख्यमंत्री दो रहे बाबुलाल मरांडी और फिर अर्जुन मुंडा.

लेकिन वर्ष 2005 में चुनाव के बाद स्थिति और बिगड़ी. किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. पहले शिबू सोरेन मुख्यमंत्री बने लेकिन 10 दिन बाद ही समर्थन के अभाव में उन्हें पद छोड़ना पड़ा.

निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा के अर्जुन मुंडा ने सरकार बनाई तो क़रीब डेढ़ साल बाद ही निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा के नेतृत्व में बग़ावत हो गई. सरकार गिरी तो मधु कोड़ा को मुख्यमंत्री बनाया गया.

मधु कोड़ा को झामुमो ने भी समर्थन दिया था

राज्य की राजनीतिक अस्थिरता के बारे में दुर्गा सोरेन कहते हैं, "ये झारखंड का दुर्भाग्य है. जिन्होंने झारखंड के नाम का विरोध किया, उन्हें ही पहली सरकार बनाने का मौक़ा मिल गया तो आगे क्या होगा. हमलोगों ने झारखंड के लिए आंदोलन किया, बलिदान दिया. लेकिन सरकार चलाने का मौक़ा नहीं मिला."

राजनीतिक अस्थिरता के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख शिबू सोरेन राज्य में अपनी सरकार बनाने की कोशिश में लगे रहे. केंद्र में वामपंथी पार्टियों के समर्थन वापस लेने के बाद सोरेन को समर्थन देने के बदले मुख्यमंत्री बनाए जाने का आश्वासन मिला.

जब इसे पूरा करने में देर हुई तो गुरुजी ने कोड़ा सरकार से समर्थन वापस लेकर एक दाँव खेला. अब मधु कोड़ा को गद्दी से हटाने में तो गुरुजी सफल हो गए हैं लेकिन अब वे सरकार बनाने के अंकगणित में उलझे हुए हैं और उनकी राह आसान नहीं दिखती.

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