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'अमरीकी सेना 2011 तक इराक़ छोड़ेगी'

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इराक़ से अमरीकी सैनिकों की वापसी लंबे समय से विवादित विषय है
इराक़ में यह आरंभिक सहमति बन गई है कि अमरीकी सेना 2011 के अंत तक इराक़ छोड़ देंगी. अब इस मसौदे को राजनीतिज्ञों की मंजूरी चाहिए होगी. दोनों पक्षों का कहना है कि यह सहमति भी बन गई है कि अगले साल के मध्य तक अमरीकी फ़ौजें शहरी इलाक़ों से हट जाएँगीं.

एक सुरक्षा समझौते के मसौदे में इन तारीखॉं का ज़िक्र किया गया है लेकिन अभी इस समझौते पर चर्चा होनी है. एक बार इस पर अंतिम सहमति बन जाती है तो इस पर वरिष्ठ इराक़ी राजनीतिज्ञों का अनुमोदन चाहिए होगा और फिर इराक़ी संसद की मुहर की भी ज़रुरत होगी.

27 बिंदुओं वाले इस समझौता मसौदे में इराक़ी क़ानूनों के तहत अमरीकी सैनिकों को संरक्षण देने की भी बात की गई है. इस बीच कट्टरपंथी शिया धार्मिक नेता मुक़्तदा अल-सद्र के हज़ारों समर्थकों ने इस मसौदे के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए हैं.

उनका कहना है कि यदि यह समझौता हो गया तो इराक़ अमरीका का उपनिवेश बनकर रह जाएगा.

लक्ष्य और विवाद

दस महीने की चर्चा के बाद इस मसौदे पर सहमति बनी है. इराक़ी अधिकारी मोहम्मद अल-हज महमूद ने इस मसौदे पर अमरीकी अधिकारियों से चर्चा की.

उनका कहना है कि इस मसौदे पर फ़िलहाल दोनों पक्षों में सहमति है लेकिन अब यह राजनीतिज्ञों पर है कि वे इसे स्वीकार करते हैं या नहीं. इस समझौते में सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर था कि क्या इराक़ी क़ानून के तहत अमरीकी सैनिकों को संरक्षण दिया जाए?

मोहम्मद अल-हज महमूद का कहना है कि अमरीकी सैनिकों को सैन्य कार्रवाई के दौरान क़ानूनी संरक्षण जारी रहेगा. और इसके अलावा जो दूसरे मामले होंगे उस पर एक संयुक्त न्यायिक समिति विचार करेगी.

इस मसौदे को अब राष्ट्रपति परिषद की मंज़ूरी की ज़रुरत होगी और फिर संसद की. संवाददाताओं का कहना है कि यह आसान नहीं होगा.

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