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आज होगी एनएसजी की अहम बैठक

By Staff
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भारत परमाणु सुरक्षा को लेकर आईएईए से पहले ही समझौता कर चुका है
गुरुवार को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) की एक अहम बैठक होने जा रही है. इसमें भारत-अमरीका असैन्य परमाणु समझौते को मंज़ूरी दी जानी है.

इसमें भारत और अमरीका के बीच हुए असैन्य परमाणु समझौते को मंज़ूरी दी जानी है. इस मंज़ूरी के बाद ही यह समझौता अमरीकी संसद के सामने रखा जाएगा और तब इसे लागू किया जा सकेगा.

ख़बरें हैं कि ज़्यादातर देश इस समझौते को मंज़ूरी देने के पक्ष में हैं लेकिन तीन-चार छोटे देश बुधवार को रात तक इस बात पर अड़े हुए थे कि परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए बिना किसी भी देश को ऐसे समझौते की मंज़ूरी नहीं दी जानी चाहिए.

चूंकि भारत एनएसजी का सदस्य नहीं है इसलिए वो इस बैठक में हिस्सा नहीं ले सकता.

हालांकि भारतीय अधिकारी विएना पहुँच गए हैं और बुधवार को उन्होंने एनएसजी के बहुत से सदस्य देशों से मुलाक़ात की है.

जिसमें 45 सदस्यीय एनएसजी के मुखिया देश जर्मनी के अलावा हंगरी और दक्षिण अफ़्रीका प्रमुख हैं.

गुरुवार को दोपहर में भारत को एक बार फिर मौक़ा मिलेगा कि वह एनएसजी के सदस्य देशों को इस समझौते के पक्ष में राज़ी कर सके.

बैठक

एनएसजी की औपचारिक बैठक गुरुवार को सुबह साढ़े नौ बजे शुरु होगी और फिर ग्यारह बजे इसे थोड़ी देर के लिए स्थगित कर दिया जाएगा.

यह वही समय होगा जब भारत को एनएसजी के सदस्य देशों को अपनी बात समझाने और उन्हें सहमत करने का औपचारिक मौक़ा मिलेगा.

फ़िलहाल जो प्रस्ताव एनएसजी के सामने रखा जाना है उसमें भारत को इस समझौते के लिए बिना शर्त मंज़ूरी देने की बात कही गई है.

अमरीकी प्रशासन चाहता है कि परमाणु समझौता बुश का कार्यकाल ख़त्म होने से पहले पूरा हो जाए

हालांकि आयरलैंड, ऑस्ट्रिया, न्यूज़ीलैंड और नीदरलैंड्स ऐसे देश हैं जो चाहते हैं कि भारत को बिना शर्त मंज़ूरी नहीं दी जानी चाहिए.

वे चाहते हैं कि परमाणु परीक्षण करने की स्थिति में परमाणु सामग्री की आपूर्ति रोकने की शर्त भी इस सहमति में जोड़ी जानी चाहिए.

विएना में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन का कहना है कि भारत दो तरह से अपनी बात रख रहा है. एक तो वह बड़े देशों को समझा रहा है कि भारतीय राजनीतिक परिस्थितियों में बिना शर्त मंज़ूरी कितनी ज़रूरी है.

दूसरा वह आपत्ति करने वाले छोटे देशों को समझा रहा है कि यदि बिना शर्त मंज़ूरी नहीं मिलती है तो भारत इस समझौते पर आगे ही नहीं बढ़ सकेगा.

सिद्धार्थ वरदराजन का कहना है कि यदि एनएसजी से बिना शर्त मंज़ूरी नहीं मिली तो भारत अपने 14 संयंत्र अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी के लिए खोलने के समझौते से भी हट जाएगा.

उनका कहना है कि यदि भारत अपने इरादे पर अटल दिखता है तो उसे मंज़ूरी मिलने की अच्छी संभावना दिखती है. यदि यह मंज़ूरी गुरुवार को नहीं मिली तो हफ़्ते-दस दिन बाद मिलेगी पर मिल जाएगी.

भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन भारत का पक्ष रखने विएना पहुँचे हुए हैं.

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