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गिलानी ने की कश्मीर का पाक के साथ विलय की मांग (लीड-3)

By Staff
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श्रीनगर/जम्मू 18 अगस्त (आईएएनएस)। अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने सोमवार को जम्मू कश्मीर के पाकिस्तान के साथ विलय की मांग की। उधर हुर्रियत के उदारवादी धड़े ने स्वतंत्रता और कश्मीर मुद्दे पर त्रिपक्षीय बातचीत की मांग की।

इस बीच घाटी के सभी तबकों के हजारों लोगों ने सोमवार को आजाद कश्मीर की मांग के साथ यहां एकत्रित होकर पाकिस्तान और इस्लाम समर्थक नारे लगााते हुए श्रीनगर स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की ओर बढ़ना शुरू किया, जहां उन्होंने ज्ञापन सौंपे।

श्रीनगर में स्थानीय टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर पर एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए गिलानी ने कहा, "पाकिस्तान के साथ विलय के अतिरिक्त कश्मीर मुद्दे का कोई हल नहीं है। हम पाकिस्तानी हैं और पाकिस्तान हमारा है क्योंकि हम उससे इस्लाम के माध्यम से जुड़े हुए हैं। "

हुर्रियत के उदारवादी धड़े के साथ एक मंच पर गिलानी ने कहा कि कश्मीर के अलगाववादियों के बीच नेतृत्व का मुद्दा हल हो चुका है।

गिलानी ने लोगों से पूछा, "क्या आप मेरे नेतृत्व में यकीन करते हैं? मैं अपनी मौत तक आप के साथ वफादार रहूंगा और सब को साथ लेकर चलूंगा।" लोगों ने इसके जवाब में कहा, "जरूर"।

इससे पहले हुर्रियत के उदारवादी नेता मीरवाइज उमर फारुक ने कश्मीर मुद्दे पर त्रिपक्षीय बातचीत की मांग की थी। उन्होंने कहा, "हम भारत से कश्मीर मुद्दे पर बातचीत शुरू करने, श्रीनगर-मुजफ्फराबाद मार्ग को व्यापार के लिए खोलने और भारतीय जेलों में बंद सभी कश्मीरियों को रिहा करने की मांग करते हैं।"

स्वतंत्रता समर्थक नेता यासिन मलिक ने कहा कि हम भारत और पाकिस्तान दोनों के शासन से अलग कश्मीरी आजादी चाहते हैं।

गिलानी ने इन सभी बातों का विरोध करते हुए कहा कि एक बार कश्मीर का पाकिस्तान के साथ विलय हो जाए उसके बाद इन सभी बातों को हल कर लिया जाएगा।

उधर श्रीनगर स्थित 'संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह कार्यालय' (यूएनएमओजी) तक आयोजित मार्च को अलगाववादी गुट हुर्रियत कांफ्रेंस का समर्थन हासिल है। हुर्रियत चाहती है कि कश्मीर घाटी के लंबे समय से विवादित मुद्दे में संयुक्त राष्ट्र के अध्यक्ष बान की-मून हस्तक्षेप करें।

हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कहा, "घाटी पर थोपी गई आर्थिक नाकेबंदी के मद्देनजर ज्ञापन में कश्मीर मसले के स्थायी समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।"

पूर्व आतंकवादी और हुर्रियत के वरिष्ठ नेता जावेद अहमद मीर ने सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में कश्मीर को भारत से आजाद कराने और कश्मीर में 'सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार देने वाले निष्ठुर कानूनों' को हटाने की मांग की गई है।

हुर्रियत के उदारवादी धड़े के नेता मीर वाइज उमर फारुक ने भी अपने हजारों समर्थकों के एक मार्च का नेतृत्व किया।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया,"हमने यूएनएमओजी के आसपास लोगों की भारी भीड़ जमा होने से रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं।"

सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि रविवार देर शाम तक प्रशासन इस बात को लेकर दुविधा में था कि हुर्रियत कांफ्रेंस के समर्थकों को ऐसे संवेदनशील स्थान पर जुटने से रोकने के लिए कर्फ्यू लगाए या नहीं। रैली की इजाजत दिए जाने पर इस जगह मौजूद कई महत्वपूर्ण कार्यालयों और इमारतों को शरारती तत्व निशाना बना सकते हैं।

सरकार ने बाद में हालांकि हुर्रियत नेताओं को संगठन के प्रत्येक घटक समूह को ज्ञापन सौंपने की इजाजत देने का फैसला किया लेकिन साथ ही उनसे ज्यादा भीड़ एकत्र नहीं करने का अनुरोध भी किया, क्योंकि ज्यादा लोगों के जमा होने से फिर से सुरक्षा बलों के साथ उनकी झड़पें हो सकती हैं।

श्रीनगर के ऊपरी इलाकों में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए थे और भीड़ को टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर तक ही रोकने के लिए अवरोधक लगाए गए थे। यह सेंटर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय से करीब 200 मीटर की दूरी पर है।

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय तक जाने वाले सभी मार्ग बंद कर दिए गए थे और वहां सैंकड़ों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे।

सूत्रों मुताबिक सरकार ने सुरक्षाकर्मियों से बेहद संयम बरतने और भीड़ के बेकाबू होने की सूरत में न्यूनतम बल प्रयोग करने को कहा है।

उधर जम्मू में श्रीअमरनाथ श्राइन बोर्ड को आवंटित भूमि वापस लिए जाने का विरोध कर रही 'श्रीअमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति' (एसएवाईएसएस) के सैकड़ों सदस्यों ने सोमवार को गिरफ्तारी दी।

एसएवाईएसएस का सोमवार से तीन दिनों तक चलने वाला 'जेल भरो' आंदोलन शुरू हो गया। समिति के संयोजक लीला करण शर्मा के नेतृत्व में आंदोलकारियों के पहले जत्थे ने रेहाड़ी क्रॉसिंग पर गिरफ्तारी दी।

इसके अलावा सैंकड़ों लोगों ने बख्शी नगर, परेड ग्राउंड, सिटी चौक और पक्का डांगा में गिरफ्तारी दी। गिरफ्तारी देने वाले लोग भगवान शिव के नाम का नारा लगा रहे थे।

सभी प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्वक गिरफ्तारी दी। गिरफ्तार लोगों की संख्या के बारे में पुलिस ने फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी है। जेल भरो आंदोलन में सोमवार को केवल पुरुषों ने हिस्सा लिया। महिलाएं और बच्चे मंगलवार और बुधवार को गिरफ्तारी देंगे।

इससे पूर्व सुरक्षाकर्मियों ने जम्मू में प्रवेश करने के सभी रास्तों को सील कर दिया। पूरे शहर में सैंकड़ों पुलिसकर्मियों, अर्धसैनिक बलों और सेना के जवानों को तैनात किया गया है।

समिति ने रविवार को आंदोलन तेज करने की घोषणा की थी और कहा था कि कम से कम एक लाख लोग गिरफ्तारी देंगे। समिति के संयोजक लीला करण शर्मा ने कहा कि आंदोलन कुचलने के लिए सभी नेताओं को गिरफ्तार किया जा सकता है।

आंदोलन के कारण जम्मू में बंद जैसा माहौल बना हुआ है। सड़कों पर वाहनों की संख्या काफी कम है। यहां घरेलू गैस सिलेंडरों की सबसे अधिक किल्लत महसूस की जा रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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