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बीजिंग ओलंपिक : अचरज भरी है फेल्प्स की सफलता

By Staff
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बीजिंग, 17 अगस्त (आईएएनएस)। बीजिंग ओलंपिक में अमेरिका के दिग्गज तैराक माइकल फेल्प्स की सफलता पूरी दुनिया के लिए अचरज का विषय बनी हुई है।

अब तक आठ स्वर्ण पदक जीत चुके फेल्प्स ने ओलंपिक इतिहास में अपना नाम अमर कर लिया है। उन्होंने रविवार को ओलंपिक के एक संस्करण में सात स्वर्ण जीतने का अपने देश के मार्क स्पिट्ज का रिकार्ड तोड़ दिया।

जानकारों का कहना है कि बीजिंग ओलंपिक में कोई भी एथलीट फेल्प्स की चमक की बराबरी नहीं कर सका है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि चमक के लिहाज से उद्घाटन समारोह ही अब तक फेल्प्स को चुनौती दे सका है।

बीजिंग ओलंपिक की शुरुआत से पहले ही अटकलें लगाई जा रहीं थीं कि फेल्प्स इस साल स्पिट्ज का रिकार्ड तोड़ देंगे। एथेंस ओलंपिक में फेल्प्स स्पिट्ज के रिकार्ड से एक कदम दूर रह गए थे। उन्होंने चार साल पहले छह स्वर्ण जीते थे।

सोलह साल पहले जिस खिलाड़ी को अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसआर्डर (एडीएचडी) से ग्रसित बताया गया था, 23 साल की उम्र में आज वह दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

एडीएचडी एक तरह की बीमारी है, जिसमें बच्चे ज्यादा देर तक किसी एक चीज पर ध्यान नहीं लगा सकते और अपनी बारी आने से पहले ही बोल पड़ते हैं। जब दो लोग बात कर रहे हों तो ऐसे बच्चे बीच में ही टोक देते हैं।

छह फुट चार इंच लंबे फेल्प्स की बाहें ही उनका सबसे बड़ा सहारा हैं। वे जब बाहें फैलाते हैं तो उसका फैलाव छह फुट सात इंच तक पहुंच जाता है। किसी तैराक को सफलता के शिखर तक पहुंचाने के लिए बाहों का इतना ज्यादा फैलाव एक बहुत बड़ा सहायक कारक है।

कुछ समय पहले महिला एथलीट मैरियन जोंस के प्रतिबंधित दवा के सेवन का दोषी पाए जाने के बाद भला अमेरिका को खेलों की दुनिया में फिर से अपना दबदबा बनाने के लिए फेल्प्स से बेहतर दूत और कौन मिल सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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