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टीकमगढ़ में चरखों से अंधेरे में बिखरेगी रोशनी

By Staff
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टीकमगढ़, 16 अगस्त (आईएएनएस)। चरखे अब धागा कातने के साथ अंधेरे में रोशनी भी बिखेरने का काम करेंगे, क्योंकि खादी ग्रामोद्योग आयोग स्फूर्ति योजना के तहत टीकमगढ़ जिले को 200 ई-चरखे (इलेक्ट्रानिक चरखे) उपलब्ध कराने जा रहा है, जिनसे रोशनी उत्पन्न होगी।

खादी ग्रामोद्योग आयोग ने जनवरी 2008 से स्फूर्ति योजना की शुरुआत की है। इस योजना के लिए मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले का भी चयन किया गया है। टीकमगढ़ में बड़ी तादाद में महिलाएं धागा कताई का काम करती आ रही हैं। इन महिलाओं को 100 चरखे उपलब्ध कराए जा चुके हैं जो साधारण किस्म के हैं। पिछले दिनों दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों और राजस्थान में साधारण चरखों के स्थान पर ई-चरखे प्रदान किए गए हैं।

ई-चरखों में एक डायनेमो को इस तरह से जोड़ा गया है कि धागे की कताई करते वक्त उससे बिजली उत्पन्न होती है। जिससे जोड़कर एक बल्ब को जलाया जा सकता है। ऐसा होने पर रात के वक्त महिलाओं को धागा कातने में किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी। इसी बात को ध्यान में रखकर टीकमगढ़ खादी ग्रामोद्योग ने 200 ई-चरखों की मांग की है।

खादी ग्रामोद्योग टीकमगढ़ के सचिव एम़ एम़ सिद्दिकी ने आईएएनएस को बताया है कि यह अलग तरह के चरखे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में धागा कताई करने वाली महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित होंगे। ग्रामीण इलाकों में रात के वक्त बिजली न रहने से महिलाएं धागा कताई का काम नहीं कर पाती हैं। ई-चरखे आ जाने से उनकी इस समस्या का तो निदान होगा ही साथ ही घर में भी रोशनी होगी।

सिद्दिकी ने बताया कि मध्यप्रदेश में अभी कहीं भी ई-चरखे नहीं हैं। अगर यह चरखे उन्हें मिल जाते हैं तो टीकमगढ़ मध्यप्रदेश का पहला ऐसा जिला होगा जहां की महिलाएं ई-चरखे से धागा कातेंगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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