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बीजिंग ओलंपिक : अखिल ने बरकरार रखी पदक की आस (राउंडअप)

By Staff
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बीजिंग, 15 अगस्त (आईएएनएस)। बीजिंग ओलंपिक की टेनिस स्पर्धा के युगल मुकाबलों में महेश भूपति और लिएंडर पेस तथा निशानेबाजी में गगन नारंग और संजीव राजपूत की हार के बाद भारतीयों के मुरझाए चेहरे पर शुक्रवार को उस समय खुशी की लहर दौड़ गई जब मुक्केबाज अखिल कुमार ने रूस के विश्व चैंपियन मुक्केबाज सर्गेई वोदाप्यानोव को धूल चटा दी।

दो दिनों में भारत को पहली खुशखबरी मिली थी। इस खुशखबरी में बीजिंग ओलंपिक में एक और पदक मिलने की आस छुपी थी, लिहाजा टेनिस खिलाड़ियों तथा निशानेबाजों की हार से निराश भारतीयों में अखिल की जीत ने जान फूंक दी।

अखिल क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुके हैं। ओलंपिक में पदक हासिल करने के लिए उन्हें एक अदद जीत की जरूरत है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए अखिल ने जोरदार खेल दिखाया। पुरुषों के 54 किलोग्राम भार वर्ग में अखिल और सर्गेई का मुकाबला 9-9 की बराबरी पर छूटा, लेकिन बेहतर पंच के आधार पर अखिल को विजेता घोषित किया गया।

प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दूसरे दौर के बाद 3-6 से पिछड़ रहे अखिल ने तीसरे दौर में विश्व नंबर एक मुक्केबाज सर्गेई पर मुक्कों की झड़ी लगाते हुए 7-8 के अंतर से अपनी स्थिति बेहतर कर ली।

आखिरी दौर में हरियाणा के छोटे से शहर भिवानी के इस मुक्केबाज ने शानदार इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए मुकाबले में 9-9 की बराबरी हासिल कर ली। इसके बाद रेफरी ने बेहतर पंच के आधार पर अखिल को विजेता घोषित किया।

रेफरी के इस फैसले पर सर्गेई अपनी निराशा नहीं रोक सके और रिंग में ही रो पड़े। दूसरी ओर, ओलंपिक में पदक जीतने के लिए अखिल को एक और मुकाबला जीतने की जरूरत है।

2006 राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता अखिल ने जीत के बाद कहा, "सर्गेई विश्व चैंपियन हैं। यह मुकाबला बहुत कठिन रहा, लेकिन मैं भी हार मानने वाला नहीं था क्योंकि मैं यहां स्वर्ण पदक जीतने आया हूं। मैं सिर्फ स्वर्ण जीतने आया हूं, रजत या कांस्य नहीं।" भारतीय टीम के कोच गुरबख्श सिंह ने कहा, "अखिल बेहतरीन मुक्केबाज हैं। मैं उनकी जीत से बहुत खुश हूं।"

पहले राउंड के मुकाबले में अखिल ने विश्व चैंपियनशिप के पूर्व कांस्य पदक विजेता फ्रांस के अली हलाब को 12-5 से पराजित किया था। अखिल के अलावा भारत के एक और मुक्केबाज जितेंद्र कुमार दूसरे दौर में पहुंच चुके हैं। जितेंद्र का प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबला शनिवार को होगा।

टेनिस में भी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे भारतीयों को उस समय निराशा हाथ लगी, जब पेस-भूपति की जोड़ी स्विटजरलैंड के रोजर फेडरर और स्टेनिसलास वॉवरिंका की जोड़ी से 6-2, 6-4 से हार गई।

पेस-भूपति की चुनौती 80 मिनट में समाप्त हो गई। युगल विशेषज्ञ के रूप में विश्व वरीयता क्रम के शीर्ष तक का सफर तय कर चुकी भारतीय जोड़ी ऐसे खिलाड़ियों से हारी जो आमतौर पर एकल मुकाबले खेलते हैं। पेस-भूपति ने अब तक सम्मिलित तौर पर 82 युगल खिताब जीते हैं।

13 साल से एक दूसरे के साथ खेल रहे पेस-भूपति ने पिछले सात साल एक दूसरे से अलग खेलते हुए बिताया है। मैच के बाद पेस ने कहा, "मैच खत्म होने के आधे घंटे बाद भी मैं सोच रहा हूं कि आखिर हमने गलती कहां की। क्या हमने कोई मौका गंवाया? हो सकता है हमने कोई मौका गंवाया हो। कुल मिलाकर, फेडरर और वॉवरिंका ने अच्छा खेल दिखाया।"

रोजर फेडरर विश्व वरीयता क्रम में इस सप्ताह जहां दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं, वहीं वॉवरिंका दसवें स्थान पर हैं। सेमीफाइनल में फेडरर-वॉवरिंका की भिड़ंत बॉब और माइक ब्रायन से होगा, जबकि दूसरे सेमीफाइनल में अर्नाड क्लीमेंट और माइकल लोड्रा स्वीडन के साइमन एस्पिलीन और थामस जोहानसन की जोड़ी से भिड़ेंगे।

रोइंग में बजरंगलाल ठक्कर ने हालांकि 21वां स्थान हासिल करते हुए अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया, लेकिन इस मुकाबले में भारतीय चुनौती समाप्त हो गई। ठक्कर हालांकि पहले 1500 मीटर तक आगे चल रहे थे, लेकिन अंतिम 500 मीटर में वे दो स्थान पीछे चले गए। ठक्कर ने यह रेस सात मिनट 9.73 सेकेंड में पूरी की।

इससे पहले उन्होंने पिछले साल म्यूनिख में हुई विश्व चैंपियनशिप में यह दूरी सात मिनट 41.73 सेकेंड में तय की थी। भारत के अन्य खिलाड़ी देवेंद्र सिंह खंडेलवाल और मनजीत सिंह लाइटवेट डबल स्कल्स स्पर्धा में 19वें स्थान पर रहे।

शुक्रवार को सबसे पहले निशानेबाजी में भारतीय चुनौती समाप्त हुई। पुरुषों की 50 मीटर प्रोन राइफल स्पर्धा में गगन और राजपूत फाइनल में स्थान नहीं बना सके। राजपूत 591 अंकों के साथ 26वें स्थान पर रहे, जबकि नारंग क्वालिफाइंग दौर में 589 अंक ही हासिल कर सके। युक्रेन के अर्तुर आयवजिन अधिकतम 600 अंकों में से 599 अंक जुटाकर पहले स्थान पर रहे।

शुक्रवार को ही एथलेटिक्स स्पर्धाएं भी शुरू हुईं, लेकिन भारतीय खिलाड़ी इसमें अच्छी शुरुआत नहीं कर सके। हेप्ताथलन में भारत की तीन खिलाड़ी और डिस्कस थ्रो में भारत के दो खिलाड़ी अपने श्रेष्ठ स्तर को भी नहीं छू सके।

भारत की डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पूनिया और हरवंत कौर फाइनल में स्थान नहीं बना सकीं। पूनिया अगर एशियाई खेलों के अपने प्रदर्शन को दोहरा लेतीं तो वह फाइनल के लिए क्वालिफाई कर गई होतीं। एशियाई खेलों में पूनिया ने 61.53 मीटर के साथ कांस्य जीता था, लेकिन बीजिंग में वह अपने दूसरे प्रयास में सिर्फ 58.23 मीटर की दूरी नाप सकीं। पहले प्रयास में वह 57.31 और तीसरे प्रयास में 58.15 मीटर की दूरी नाप सकी थीं।

इसी तरह हरवंत भी निराश करते हुए ओलंपिक से बाहर हो गईं। हरवंत ने 56.42 मीटर की दूरी नापी, हालांकि उनका व्यक्तिगत श्रेष्ठ 61.09 मीटर रहा है।

हेप्ताथलन में भारत की जे. जे. शोभा पहले दिन 3482 अंक जुटाकर 29वें स्थान पर कायम हैं, जबकि जी.जी. प्रमिला 3419 अंकों के साथ 32वें और सुषमा सिंह रॉय 3391 अंकों के साथ 34वें स्थान पर हैं। फाइनल में पहुंचने के लिए भारतीय खिलाड़ियों को कम से कम 6000 अंक जुटाने होंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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