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रिज़वान मामले में कोर्ट का कड़ा फ़ैसला

By सुबीर भौमिक
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पिछले साल सितंबर में रिज़वान की मौत हो गई थी
पिछले साल सितंबर में रिज़वान की मौत हो गई थी
रिज़वान
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कलकत्ता हाई कोर्ट ने रिज़वान मामले में कोलकाता पुलिस को जम कर फटकार लगाई और सीबीआई को आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है.

कोलकाता के एक बड़े व्यापारी अशोक टोडी की बेटी प्रियंका टोडी से शादी करने के एक महीने बाद ही पिछले साल सितंबर में रिज़वान-उर-रहमान की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी.

रिज़वान मामले में अपना फ़ैसला सुनाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस दीपंकर दत्ता ने कहा कि कोलकाता पुलिस क़ानूनी रूप से विवाहित जोड़े की सुरक्षा नहीं कर पाई. कोलकाता पुलिस अपना कर्तव्य निभाने में नाकाम रही.

जस्टिस दत्ता ने अपने फ़ैसले में कहा, "इस पूरे प्रकरण में गड़बड़ी का संदेह करने के कारण मौजूद हैं." उन्होंने इस मामले में सभी सात अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया.

सात अभियुक्तों में से तीन कोलकाता पुलिस के अधिकारी हैं, जिनमें पूर्व ख़ुफ़िया प्रमुख अजय कुमार भी शामिल हैं. अन्य अभियुक्तों में शामिल हैं- अशोक तोडी, प्रदीप तोडी, अनिल सरावगी और एक मुस्लिम एनजीओ कार्यकर्ता मोईनुद्दीन.

मोईनुद्दीन उर्फ़ पप्पू के माध्यम से तोडी परिवार ने रहमान परिवार से बातचीत करने की कोशिश की थी. तोडी परिवार मूल रूप से राजस्थान से आते हैं और वे इस समय कोलकाता के बड़े औद्योगिक परिवार में से एक हैं.

अशोक तोडी की बेटी प्रियंका ने अपने परिवार की ईच्छा के ख़िलाफ़ पिछले साल रिज़वान-उर-रहमान से शादी की थी. रिज़वान के परिवारवालों का आरोप है कि तोडी परिवार ने इस शादी को तोड़ने के लिए हरसंभव कोशिश की.

आरोपपत्र

हाई कोर्ट के फ़ैसले के बाद सीबीआई दो सप्ताह के अंदर सातों अभियुक्तों के ख़िलाफ़ निचली अदालत में आरोपपत्र दाखिल करेगी. इस दौरान अभियुक्त हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं.

लगता है कि लालबाज़ार (कोलकाता पुलिस मुख्यालय) सिर्फ़ धनी और प्रभावशाली लोगों की ही मदद करता है. ग़रीब केवल पुलिस स्टेशन तक ही जा सकते हैं. लेकिन इस मामले में तो रहमान परिवार को पुलिस स्टेशन से भी मदद नहीं मिली

जस्टिस दीपंकर दत्ता ने पश्चिम बंगाल सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि 'काम में लापरवाही' के मामले में कोलकाता पुलिस के पूर्व प्रमुख प्रसून मुखर्जी, उपायुक्त ज्ञानवंत सिंह और तीन अन्य जूनियर अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए.

जस्टिस दत्ता ने कहा- प्रसून मुखर्जी ने ग़ैर ज़िम्मेदारी से काम किया और कई तथ्यों को दबाने की कोशिश की.

कोलकाता पुलिस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए जस्टिस दत्ता ने कहा- लगता है कि लालबाज़ार (कोलकाता पुलिस मुख्यालय) सिर्फ़ धनी और प्रभावशाली लोगों की ही मदद करता है. ग़रीब केवल पुलिस स्टेशन तक ही जा सकते हैं. लेकिन इस मामले में तो रहमान परिवार को पुलिस स्टेशन से भी मदद नहीं मिली.

सीबीआई का कहना है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने उसकी पड़ताल को सही ठहराया है और अब वह सात अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला शुरू करेगी और उन पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला चलाया जाएगा.

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