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'हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है'

By Staff
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स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम पहला संबोधन
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम पहला संबोधन
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में हिंसा और आतंकवाद से निबटने पर ज़ोर दिया है.

राष्ट्रपति के रूप में स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर अपने पहले संबोधन में उन्होंने कहा, "कोई भी समस्या हो, कोई भी मु्द्दा हो, कोई भी कारण हो लेकिन भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है. ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिसे बातचीत के ज़रिए न सुलझाया जा सके. मैं देश के सभी हिस्सों में शांति बनाए रखने की अपील करती हूँ."

आतंकवाद को एक विश्वव्यापी समस्या बताते हुए उन्होंने मिलजुलकर इसका मुक़ाबला करने पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा, "आतंकवादी मज़बूत भारत के इरादों को विचलित करने में कभी कामयाब नहीं होंगे."

उन्होंने कहा कि भारत में विकास हो रहा है लेकिन यह ज़रूरी है कि उसका लाभ हर गाँव, क़स्बे और ज़िले तक पहुँचना चाहिए. राष्ट्रपति ने कहा, "हम जब भी कोई काम करें ग़रीब आदमी का चेहरा ध्यान में रखना चाहिए और सोचना चाहिए कि इसका लाभ उस तक पहुँचेगा या नहीं."

आतंकवादी मज़बूत भारत के इरादों को विचलित करने में कभी कामयाब नहीं होंगे

प्रतिभा पाटिल ने अपने भाषण सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए सशक्त प्रयास करने पर ज़ोर दिया और कहा कि बाल मज़दूरी, कन्या भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, दहेज और महिलाओं के साथ भेदभाव को मिटाए बिना राष्ट्र का पूर्ण विकास नहीं हो सकता.

उन्होंने देशवासियों का आह्वान किया कि वे फल की चिंता किए बिना राष्ट्रनिर्माण के काम में जुट जाएँ, राष्ट्र का भला होगा तो सबका भला होगा. उन्होंने रवींद्रनाथ ठाकुर की पंक्तियाँ दोहराते हुए कहा, "धरती के नीचे वृक्ष की जड़ें शाखाओं तक पोषण पहुँचाने के लिए कभी पुरस्कार नहीं माँगती हैं."

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक युवा देश है जहाँ 54 करोड़ नौजवान बसते हैं, उन्होंने युवाओं के बेहतर शिक्षा और रोज़गार के अवसरों की बात की. उन्होंने कहा कि युवाओं में उच्च नैतिक मूल्यों का होना आवश्यक है ताकि राष्ट्रनिर्माण में उच्च आदर्श शामिल हों.

प्रतिभा पाटिल कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर बल दिया, उन्होंने कहा कि भारत के 70 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं. अपने संबोधन में उन्होंने कहा, "भारत का व्यापक और पूर्ण विकास तभी संभव है जबकि कृषि उत्पादक बढ़े, हमारे वैज्ञानिकों को दूसरी हरित क्रांति ही नहीं बल्कि चिर हरित क्रांति लाने की दिशा में काम करना चाहिए."

राष्ट्रपति ने मीडिया की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि उसके ऊपर बहुत ज़िम्मेदारी है जिसे निभाने का प्रयास मीडिया को करना चाहिए.

उन्होंने ऊर्जा के वैकल्पिक और प्रदूषण मुक्त साधनों के विकास को 'राष्ट्रीय मिशन' बनाने की बात कही.

अपने भाषण में उन्होंने बीजिंग ओलंपिक में हिस्सा ले रहे भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ और स्वर्ण पदक जीतने वाले अभिनव बिंद्रा को बधाई दी.

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