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इनके लिए स्वतंत्रता दिवस जश्न नहीं गम का मौका है..

By Staff
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सईद जरीर हुसैन

सईद जरीर हुसैन

धेमाजी (असम), 14 अगस्त (आईएएनएस)। पूवरेत्तर का गेटवे कहे जाने वाले असम में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां यूं तो अपने शबाब पर पहुंच गई हैं, लेकिन सूबे में एक जिला ऐसा भी है जहां के लोग इस दिन न सिर्फ खौफजदा रहते हैं बल्कि खुद को इस आयोजन से दूर भी रखते हैं।

सूबे के धेमाजी जिले के अधिकांश बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता दिवस की परेड अपने जीवन में कभी नहीं देखी। वजह है स्वतंत्रता दिवस के दिन पूरे राज्य में उग्रवादियों का आतंक। 1980 से ये सिलसिला जारी है। इस वर्ष भी उग्रवादियों ने स्वतंत्रता दिवस के बहिष्कार की घोषणा कर रखी है।

स्वतंत्रता दिवस का दिन ज्यों-ज्यों करीब आ रहा है, धेमाजी जिले के लोगों का खौफ बढ़ता ही जा रहा है। दरअसल, लोगों के मन में 15 अगस्त 2004 को हुए उग्रवादी हमले के आतंक का खौफ अभी भी छाया हुआ है।

हर भारतीय की तरह दिपेन सैकिया ने अपने दोनों बच्चों 14 वर्षीय रूपा और 10 वर्षीय अरूणा को धीमाजी कॉलेज ग्राउंड में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शिरकत करने को भेजा था। लेकिन उनके बच्चे कभी नहीं लौटे। पहुंचा तो सिर्फ खून से लथपथ दोनों बच्चों का शव।

रूपा और अरूणा उन 12 लोगों में शामिल थे, जिनकी मौत राष्ट्रीय ध्वज फहराने के चंद मिनट पहले हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में हुई थी। यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम (उल्फा) ने इस विस्फोट की जिम्मेदारी ली थी।

सैकिया ने कहा, "मैं कभी अपने परिजनों व सगे संबंधियों को स्वतंत्रता दिवस की परेड में भाग लेने के लिए नहीं भेजूंगा। हमारे लिए तो स्वतंत्रता दिवस दुख का दिन है।"

सूबे में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के मद्देनजर जब राष्ट्रगान का धुन बजता है तो अजीत सैकिया और उनकी पत्नी तारूलता की कानों में बच्चों की चीखें चित्कार कर उठती है। इस हादसे में इस परिजन ने भी अपने 14 वर्षीय बेटे गिरिन को खोया था।

अजीत सैकिया ने कहा, "जब भी ब्रास बैंड के जरिए राष्ट्रगान की धुन हमारे कानों में पड़ती है तो हमारे दिलों दिमाग पर गिरिन की छवि घर कर जाती है।"

कुछ ऐसा ही हाल पुष्पा देउरी का है, जिन्होंने 15 अगस्त 2004 के हादसे में पत्नी धनंदा को हमेशा के लिए खो दिया। देउरी कहते हैं, "मैं स्वतंत्रता दिवस को याद ही नहीं रखना चाहता। जैसे-जैसे यह दिन करीब आता है, ऐसा लगता है कि मेरे हृदय की गति रूक जाएगी।"

धेमाजी की घटना को हुए चार साल हो चुके है और इसकी जांच भी पूरी हो चुकी है। चार साल बाद इस हादसे के लिए जिम्मेदार उल्फा के कई नेताओं को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "हमने इस घटना की जांच पूरी कर ली है। बस हमें इंतजार है सरकार की मंजूरी का ताकि हम जांच को अंजाम तक पहुंचा सके। घटना के लिए जिम्मेदार उल्फा के उग्रवादियों की सूची में मृणाल हजारिका और जितेन दत्ता के नाम हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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