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मुशर्रफ ने जताई सत्तारूढ़ गठबंधन से सुलह की मंशा

By Staff
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इस्लामाबाद/कराची, 14 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने बुधवार को सत्तारूढ़ गठबंधन से सुलह की मंशा व्यक्त की, जबकि देश के तीसरे सूबे की असेंबली ने भी उनके खिलाफ महाभियोग की मांग की।

पाकिस्तान के 61वें स्वाधीनता दिवस के मौके पर टेलीविजन पर प्रसारित राष्ट्र के नाम संदेश में मुशर्रफ ने कहा, "हमें देश में स्थायित्व लाने के लिए टकराव की जगह सुलह-सफाई का रुख अपनाना चाहिए।"

सत्तारूढ़ गठबंधन द्वारा अपने खिलाफ महाभियोग लाने की घोषणा किए जाने के बाद पहली बार सीधे टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद और देश की बदहाल होती अर्थव्यवस्था जैसे गंभीर मसलों से निपटने के लिए स्थायित्व की जरूरत है। उन्होंने कहा, "देश इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है।"

मुशर्रफ ने अपने शत्रुओं से देश को बचाने की खातिर "मतभेद" मिटाने को कहा।

उधर, पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गई। सिंध सूबे की असेंबली ने बुधवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर मुशर्रफ से विश्वास मत हासिल करने या इस्तीफा देने और ऐसा नहीं करने की सूरत में महाभियोग का सामना करने को कहा।

सत्र के दौरान असेंबली के सदस्य "जाओ, मुशर्रफ जाओ" के नारे लगाते रहे।

सदन में बहस शुरू होते ही मुशर्रफ की समर्थक मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के सदस्य वाकआउट कर गए। सदन में मुशर्रफ का बचाव करने वाला कोई नहीं रहा।

विपक्ष के नेता जाम मद्दादअली ने असेंबली के बाहर संवाददाताओं से कहा, "हमें लगता है कि यह असंवैधानिक कदम है और इसलिए हमने कार्यवाही में भाग नहीं लेने का फैसला किया।"

मुशर्रफ की सबसे ज्यादा विश्वासपात्र पाकिस्तान मुस्लिम लीग-क्यू के तीन नेताओं ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सदस्यों का साथ दिया।

सिंध की 168 सदस्यीय असेंबली में मुशर्रफ के समर्थन में एमक्यूएम और तीन अन्य छोटी पार्टियों के 69 सदस्य हैं।

अब तक पाकिस्तान के तीन सूबे मुशर्रफ के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुके हैं। बलूचिस्तान सूबे में भी शुक्रवार को ऐसा ही प्रस्ताव पारित होने के आसार हैं।

पाकिस्तान की सूचना मंत्री शेरी रहमान ने कहा, "पाकिस्तान के सत्तापक्ष और लोकतंत्र की यह एक और जीत है।"

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार राष्ट्रपति ने इस्तीफा देने से इंकार करते हुए कहा है कि वे लोकतांत्रिक भावना से महाभियोग का सामना करेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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