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बिहार सरकार की 'मूषक भक्षण योजना'

By अमरनाथ तिवारी
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 बिहार में अति ग़रीब मुसहर जाति के लोग पारंपरिक रुप से चूहा खाते रहे हैं
बिहार के एक वरिष्ठ अधिकारी लोगों को चूहे खाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, उनका कहना है कि इससे अनाज और माँस दोनों की उपलब्धता बढ़ेगी.

राज्य के कल्याण मंत्रालय के प्रधान सचिव विजय प्रकाश का कहना है कि "इसे सरकारी नीति के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है और इसके लिए काफ़ी बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण वगैरह किए गए हैं".

विजय प्रकाश का कहना है कि इस नीति से मुसहर जाति के 23 लाख लोगों का कल्याण होगा और ग़रीब लोगों का पेट भी भर सकेगा.

बिहार की मुसहर जाति के परंपरागत रूप से चूहे पकड़ने और खाने के आदी रहे हैं, मुसहर समुदाय को दलितों में भी दलित माना जाता है.

इस प्रस्ताव का एक और फ़ायदा है, चूहे हमारा आधा अनाज खा जाते हैं, उन्हें पकड़कर खाने से अनाज की बर्बादी भी बच सकेगी

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का मानना है कि इससे मुसहरों को रोज़गार मिलेगा और जो लोग मुर्गी या बकरे का माँस ख़रीदने में आर्थिक रुप से अक्षम हैं उन्हें प्रोटीन का एक साधन उपलब्ध होगा.

वे कहते हैं, "इस प्रस्ताव का एक और फ़ायदा है, चूहे हमारा आधा अनाज खा जाते हैं, उन्हें पकड़कर खाने से अनाज की बर्बादी भी बच सकेगी."

उनका तर्क है कि इस योजना से लोगों को अनाज और माँस दोनों उपलब्ध कराने में आसानी हो सकेगी.

विजय प्रकाश कहते हैं कि चूहों के माँस में अच्छी क्वालिटी का प्रोटीन होता है और थाइलैंड, चीन, कोरिया सहित दुनिया के कई देशों में उसका माँस खाया जाता है.

उनका कहना है, "चूहे में हड्डियाँ न के बराबर होती हैं और माँस काफ़ी पोषक होता है, लोग इसके बारे में नहीं जानते लेकिन धीरे-धीरे यह लोकप्रिय हो रहा है."

जब लोग उनसे कहते हैं कि भारत में चूहे खाने को लोकप्रिय बनाना एक बहुत कठिन काम है और लोग इसके लिए आसानी से राज़ी नहीं होंगे, तो वे कहते हैं कि "इसे लज़ीज़ बनाने की कई विधियाँ हमारे पास हैं जिन्हें हम होटलों को भेज रहे हैं".

पूरे देश में चूहे खाने के साथ घृणा का भाव जुड़ा हुआ है लेकिन विजय प्रकाश कहते हैं बिहार में सड़क किनारे खाना बेचने वाले अक्सर चूहे का माँस बेचते हैं जिसे लोग चाव से खाते हैं.

आइडिया

यह पहला मौक़ा नहीं है जब इस वरिष्ठ अधिकारी ने नया आइडिया पेश किया हो.

इससे पहले उन्होंने किन्नरों को प्रसूति गृहों में सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी देने का प्रस्ताव रखा था ताकि बच्चों की चोरी और अदला-बदली जैसे घटनाओं को रोका जा सके.

वे कहते हैं, "यह प्रस्ताव काफ़ी आगे बढ़ चुका है, हम किन्नरों को अपने सामाजिक कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर भागीदारी देने वाले हैं."

इसके अलावा, विजय प्रकाश चाहते हैं कि बिहार में साँप का ज़हर का निकालने का काम भी बड़े पैमाने पर होना चाहिए क्योंकि "इससे लोगों को रोज़गार और साँपों से सुरक्षा दोनों मिलेगी."

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