• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

बांग्लादेशियों को 'वर्क परमिट' पर विचार

By सुबीर भौमिक
|

मेघालय सरकार वर्क परमिट के ज़रिए स्थिति पर नियंत्रण रखना चाहती है
मेघालय सरकार वर्क परमिट के ज़रिए स्थिति पर नियंत्रण रखना चाहती है
बांग्लादेशियों की बस्ती
बांग्लादेशियों की बस्ती
मेघालय के मुख्यमंत्री का कहना है कि मेघालय में गै़र-क़ानूनी ढंग से आए बांग्लादेशी मजदूरों को 'वर्क परमिट' देने के बारे में सरकार सोच रही है.

राज्य में मेघालय प्रोग्रेसिव एलायंस (एमपीए) के सत्ता संभालने के बाद सीमा पार से गैरक़ानूनी ढंग से आने वाले बांग्लादेशियों के मुद्दे पर एक कैबिनेट समिति का गठन किया था.

मेघालय के मुख्यमंत्री दोनकेपुर रॉय ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "गैर कानूनी ढंग से मेघालय में आ गए बांग्लादेशियों को वर्क परमिट देने के बारे कैबिनेट समिति ने सुझाव दिया है. समिति का कहना है कि वे यहाँ काम कर सकते हैं, लेकिन वे यहाँ बस नहीं सकते या जायदाद नहीं ख़रीद सकते."

उन्होंने कहा कि वे गंभीरता पूर्वक इस मसले पर सोच रहे हैं और इस मामले पर वे केंद्र सरकार के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं.

कैबिनेट समिति ने सुझाव दिया है कि भारत के दूसरे राज्यों से आकर मेघालय में बसने वालों लोगों पर नियम क़ानून लागू होने चाहिए, वे अपनी मर्ज़ी से मेघालय में नहीं बस सकते.

समिति का कहना है कि वे यहाँ काम कर सकते हैं, लेकिन वे यहाँ बस नहीं सकते या जायदाद नहीं ख़रीद सकते

समिति के चेयरमैन पॉल लिंग्दोह ने बीबीसी को बताया कि समिति ने सुझाव दिया है कि प्रस्तावित वर्क परमिट तीन महीने के लिए होगा जिसे हर तीन महीने पर नवीकृत कराना होगा.

उन्होंने बताया, "बांग्लादेशी मजदूरों की सेवा लेने वाले कांट्रेक्टर को क़ानूनन स्थानीय स्वतंत्र जनजातीय ज़िला परिषद में रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा और उन्हें हर मजदूर के अता पता के बारे में बताना होगा. इसमें चूक होने पर उनका ट्रेड लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा साथ ही उन्हें जुर्माना भी भरना पड़ेगा."

उन्होंने कहा कि 'इंटर स्टेट वर्कमेन रेग्युलेशन 1979' को भी मजबूत करने की जरुरत पर समिति ने जोर दिया है कि ताकि प्रवासी मजदूर स्थायी निवासी होने का दावा न करें.

आंदोलन की धमकी

भारतीय क़ानून के मुताबिक कोई भी यदि छह महीने से ज़्यादा समय से किसी राज्य में रह रहा हो तो वह स्थायी निवासी बनने के लिए आवेदन कर सकता है.

खासी छात्र संघ ने धमकी दी है कि यदि वर्क परमिट को तुरंत लागू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करेंगें.

'गैर क़ानूनी प्रवासियों' पर कड़ाई करने की माँग मेघालय के स्थानीय जनजातियों के हितों को लेकर काम करने वाले समूह और विभिन्न पार्टी करते रहे हैं.

एमपीए के वरिष्ठ नेता पीए संगमा का कहना है कि बांग्लादेश से गैर क़ानूनी ढंग से आने वाले लोगों पर मेघालय को नज़र रखनी होगी.

उन्होंने कहा, "नहीं तो पड़ोसी राज्यों की तरह ही वे राजनीति को प्रभावित करने लगेंगे."

विश्लेषकों का कहना है कि वर्क परमिट से स्थानीय अर्थव्यवस्था को पर्याप्त मजदूर मिलेंगे और साथ ही इससे राज्य में जनसंख्या के अनुपात में एकाएक बदलाव होने का भी डर नहीं रहेगा.

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more